25 सितंबर, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने वैज्ञानिक और तकनीकी संचार के लिए हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने तथा कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रशासन और राजभाषा में ज्ञान के व्यापक प्रसार को सुगम बनाने के लिए आज तकनीकी हिंदी संगोष्ठी–2026 का आयोजन किया।
वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ, परभणी, महाराष्ट्र के कुलपति प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
डॉ. गोपाल लाल, संयुक्त निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद तथा डॉ. आर.के. माथुर, निदेशक, भाकृअनुप–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
डॉ. विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा, ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) इंद्र मणि ने इस पहल की सराहना की और वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान को समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाने में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। अपनी मातृभाषा में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान के सृजन और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. गोपाल लाल तथा डॉ. आर.के. माथुर ने भी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं की बढ़ती प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान निष्कर्षों और तकनीकी प्रगति को सरल और सुगम भाषा में संप्रेषित करने से किसानों, हितधारकों और समाज तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने में मदद मिल सकती है।
इस अवसर पर “तकनीकी हिंदी संगोष्ठी–2026: सार-संग्रह” का विमोचन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए तकनीकी शोध-पत्रों के सार शामिल हैं। संस्थान की छमाही हिंदी गृह पत्रिका ‘बारानी दर्पण’ के प्रथम अंक का भी विमोचन किया गया, जो भाकृअनुप-क्रिडा में हिंदी और ज्ञान प्रसार को निरंतर बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल है।
संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें हैदराबाद तथा देशभर के विभिन्न संस्थानों और शहरों से आए प्रतिभागियों द्वारा आमंत्रित व्याख्यान और तकनीकी प्रस्तुतियां दी गईं। प्रस्तुतियों में विज्ञान, कृषि, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, प्रशासन, राजभाषा और अन्य तकनीकी क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न समकालीन विषयों को शामिल किया गया, जिसमें वैज्ञानिक एवं तकनीकी संचार के प्रभावी माध्यम के रूप में हिंदी की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में 8 सितंबर 2026 से संस्थान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा–2026 के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह का भी आयोजन किया गया। वैज्ञानिकों, तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा परियोजना और संविदा कर्मियों ने विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि तकनीकी हिंदी संगोष्ठी के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
अपने अध्यक्षीय और समापन संबोधन में डॉ. विनोद कुमार सिंह ने संगोष्ठी और हिंदी पखवाड़ा–2026 के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने नियमित आधिकारिक कार्य से आगे हिंदी के उपयोग का विस्तार करने और वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान के संप्रेषण के प्रभावी माध्यम के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाकृअनुप-क्रिडा के सहायक निदेशक (राजभाषा) और तकनीकी हिंदी संगोष्ठी–2026 के संयोजक श्री संतोष कुमार आनंद ने कार्यक्रम का समन्वय किया। वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आयोजन समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान दिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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