2 नवंबर, 2026, अल्मोड़ा
भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर, बागेश्वर द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के निर्देशन एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर के नोडल अधिकारी डॉ. निर्मल हेडाऊ के कुशल मार्गदर्शन में “पशुधन आधारित समेकित खेती की तकनीकें” विषय पर सात दिवसीय (21 से 29 अक्टूबर, 2026) तक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को पशुपालन एवं कृषि आधारित विभिन्न आजीविकाओं की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना तथा समेकित कृषि प्रणाली को अपनाकर उनकी आय एवं उत्पादन में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के डॉ. राज कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, वापीकेएएस ने कृषकों को पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी की उन्नत तकनीकों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने फलों के कलमी पौधे तैयार करने की विभिन्न विधियों, कृषि उत्पादन के प्रभावी प्रबंधन तथा फलों एवं सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। डॉ. राज कुमार ने कृषकों को स्थानीय जलवायु एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने, उत्पादन लागत कम करने तथा कृषि कार्यों में वैज्ञानिक विधियों का समावेश करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. नवल किशोर सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ पशु विज्ञान एवं प्रशिक्षण समन्वयक, ने पर्वतीय क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय, मुर्गीपालन, मत्स्य सह बत्तख पालन, बकरीपालन, प्राकृतिक खेती एवं मौसमी चारा उत्पादन की उपयोगी तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पशुओं के उचित रखरखाव, संतुलित आहार, स्वच्छता, रोगों की रोकथाम तथा पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के संबंध में कृषकों को जागरूक किया।
डॉ. कमल कुमार पांडे, विषय वस्तु विशेषज्ञ बागवानी, ने कृषकों को विभिन्न फलदार पौधों, सब्जी उत्पादन एवं बेमौसमी सब्जियों की खेती के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने पौधों की उचित देखभाल, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोगों से बचाव तथा प्रतिकूल मौसम में फसलों की सुरक्षा के उपायों के बारे में बताया।
डॉ. अमित कुमार, विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि प्रसार, ने कृषक उत्पादक संगठनों, कृषि व्यवसाय के विकास, मूल्य संवर्धन तथा कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के संबंध में जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों को दो दिवसीय कृषक शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया, जिसके माध्यम से उन्हें प्रगतिशील कृषकों द्वारा अपनाई जा रही सफल कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन के तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन करके संवाद करनें का अवसर मिला। भ्रमण के दौरान ग्राम मुझार चौरा, के प्रगतिशील कृषक श्री लाल सिंह कठायत ने अपने प्रक्षेत्र का भ्रमण कराते हुए कृषकों को कीवी उत्पादन, सब्जियों के जैविक उत्पादन, मसाला (इलायची, धनियां, हल्दी आदि) फसलों की खेती, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एवं सब्जी उत्पादन की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. के.के. जोशी, उप-मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग, श्री मनोज सिंह मियान, जिला मत्स्य अधिकारी, मत्स्यपालन विभाग तथा श्री धीरज बिष्ट, उप-परियोजना निदेशक, आत्मा, कृषि विभाग, ने ऑनलाइन माध्यम से कृषकों के साथ संवाद किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागी कृषकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र ग्रुप फोटो, मिल्क केन, कृमिनाशक दवा, खनिज मिश्रण, मटर के बीज तथा गौभी के पौध वितरित किए एवं सब्जियों के बीज वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर कृषकों को उन्नत सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्याज (वी.एल. प्याज -3) एवं मटर (वी एल मटर 13) के बीज भी वितरित किए गए।
8 गांवों के कुल 25 कृषकों ने इस कार्यक्रम में प्रतिभागिता की।
(स्रोतः भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)








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