भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा ने आत्मा उत्तर गोवा, गोवा सरकार के कृषि निदेशालय, गोवा राज्य सहकारी बैंक, श्री सातरी सहकारी दुग्ध समिति और श्री राष्ट्रोली स्वयं सहायता समूह, इब्रांपुर के सहयोग से पेरनेम के इब्रांपुर गांव में दुधारू गायों में बार-बार गर्भाधान की समस्या के प्रबंधन हेतु पोषण-हार्मोनल थेरेपी पर खेत बचाओ अभियान-सह-क्षेत्र दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य फसल और पशुधन उद्यमों के प्रभावी एकीकरण के माध्यम से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना, डेयरी उत्पादकता में सुधार करना और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करना था।
खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों और महत्व पर प्रकाश डालते हुए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित एवं मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग तथा जैविक खाद के अधिकाधिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया। किसानों को टिकाऊ कृषि और उत्पादकता बढ़ाने के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सब्सिडी के बारे में भी जानकारी दी गई।
संकर गायों में बेहतर प्रजनन एवं पोषण प्रबंधन के माध्यम से बार-बार गर्भाधान की समस्या को रोकने के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की गई। भाकृअनुप–सीसीएआरआई द्वारा अनुशंसित पोषण-हार्मोनल थेरेपी को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, जिसके माध्यम से इब्रांपुर के कई डेयरी फार्मों में लगभग 66 प्रतिशत गर्भधारण दर दर्ज की गई है।

फसल-पशुधन एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि संसाधनों के पुनर्चक्रण तथा मृदा उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए गोबर, गोमूत्र, वर्मीकम्पोस्ट और कृषि अपशिष्ट के उपयोग के महत्व पर जोर दिया गया।
किसानों को कृषि एवं डेयरी गतिविधियों के संचालन में सहायता के लिए बैंकिंग सुविधाओं और संस्थागत ऋण योजनाओं की जानकारी दी गई। डेयरी फार्मिंग और वर्मीकम्पोस्टिंग के क्षेत्र में एक सफल अनुभव के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि किस प्रकार जैविक कृषि अपशिष्ट को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे अपशिष्ट कम करने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और अतिरिक्त आय अर्जित करने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के अंतर्गत टिकाऊ फसल उत्पादन और बेहतर कृषि प्रबंधन पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए गोवा सरकार के कृषि विभाग द्वारा किसानों को हाथ से संचालित पंप स्प्रेयर और वर्मीकम्पोस्ट वितरित किए गए।
इस कार्यक्रम में 40 किसानों (21 पुरुष और 19 महिलाएं) तथा सात अधिकारियों सहित कुल 47 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)








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