12-14 अक्टूबर, 2026, कोच्चि
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने वर्ल्डफिश, मलेशिया के सहयोग से 12-14 अक्टूबर, 2026 तक भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि में “मत्स्य अनुसंधान संस्थानों के लिए संगठनात्मक थ्योरी ऑफ चेंज का निर्माण” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य रणनीतिक योजना को मजबूत करना, संस्थागत अनुसंधान प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाना और मत्स्य अनुसंधान के प्रभाव को बढ़ाना है। इसमें आईसीएआर के मत्स्य संस्थानों और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि अनुसंधान परिणामों को सार्थक प्रभाव में बदलने वाली संगठनात्मक रणनीतियां विकसित करने के लिए एक साथ आए हैं।
डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने रणनीतिक प्राथमिकताओं की पहचान करने, अंतर-विषयक एवं अंतर-संस्थागत सहयोग को मजबूत करने तथा दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास परिणामों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को रूपरेखा विकसित करते समय सीखने और सहयोगात्मक योजना पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
डॉ. जाट ने कहा कि हमें भाकृअनुप संस्थानों में थ्योरी ऑफ चेंज के लिए एक व्यापक रूपरेखा विकसित करने और इसे एसएमडी, प्रभागीय और संस्थागत स्तरों पर परिष्कृत करने की आवश्यकता है। हमारी अनुसंधान प्राथमिकताएं राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए, जिन्हें प्रभावी सहयोग तथा संसाधनों के रणनीतिक उपयोग का समर्थन प्राप्त हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अनुसंधान आउटपुट सार्थक परिणामों और स्थायी सामाजिक प्रभाव में परिवर्तित हों।

डॉ. जे.के. जेना, उप-महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान), भाकृअनुप ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. जेना ने अनुसंधान आउटपुट से आगे बढ़कर समाज के लिए ठोस लाभ पैदा करने वाले डिलिवरेबल्स पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि अनुसंधान प्राथमिकताएं देश के विकास लक्ष्यों से निर्देशित होनी चाहिए और सार्थक बदलाव लाने के लिए प्रौद्योगिकियां एवं नवाचार समुदायों, किसानों, मछुआरों और उद्यमियों तक पहुंचने चाहिए।
डॉ. क्रिस्टियानो रोसिग्नोली, लीड, मॉनिटरिंग, इवैल्यूएशन, लर्निंग एंड इम्पैक्ट असेसमेंट (एमईएलआईए), वर्ल्डफिश, मलेशिया, ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अनुसंधान का प्रभाव प्रौद्योगिकियों, प्रकाशनों और वैज्ञानिक ज्ञान के विकास से कहीं आगे तक विस्तृत है। उन्होंने यह आकलन करने में निगरानी, मूल्यांकन और सीखने के महत्व को रेखांकित किया कि क्या अनुसंधान हस्तक्षेप अपेक्षित बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने निर्णयों में सुधार, साझेदारियों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने में साक्ष्य की भूमिका पर भी जोर दिया कि अनुसंधान बेहतर आजीविका, पोषण और पर्यावरणीय लचीलेपन में योगदान दे।
कार्यशाला संगठनात्मक थ्योरी ऑफ चेंज (टीओसी) विकसित करने पर केंद्रित है, जो अनुसंधान गतिविधियों और आउटपुट को अपेक्षित परिणामों तथा दीर्घकालिक प्रभावों से स्पष्ट रूप से जोड़ती है। इसका उद्देश्य भाग लेने वाले संस्थानों को प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने, विकास लक्ष्यों को परिभाषित करने, हितधारकों और साझेदारियों की मैपिंग करने तथा उन मार्गों को स्थापित करने में सहायता करना है, जिनके माध्यम से अनुसंधान सतत मत्स्य विकास में योगदान दे सकता है।
पहले दिन के सत्रों में थ्योरी ऑफ चेंज के मूल सिद्धांतों, संस्थागत प्राथमिकताओं, अपेक्षित परिणामों, मान्यताओं और प्रभाव मार्गों को शामिल किया गया। संस्थागत प्रस्तुतियों, समूह चर्चाओं और व्यावहारिक अभ्यासों ने प्रतिभागियों को चुनौतियों की पहचान करने, मौजूदा दृष्टिकोणों का आकलन करने और प्रारंभिक रूपरेखा विकसित करने के अवसर प्रदान किए।

भाकृअनुप के सभी मत्स्य संस्थानों के प्रतिनिधियों और भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद, के सदस्यों की भागीदारी संस्थागत अनुभवों को साझा करने, सहयोग को मजबूत करने और परिणाम-उन्मुख मत्स्य अनुसंधान के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने का मंच प्रदान करती है।
13 और 14 अक्टूबर के सत्र संस्थागत थ्योरी ऑफ चेंज को परिष्कृत करने, रणनीतिक हस्तक्षेपों और साझेदारियों की पहचान करने, जोखिमों और मान्यताओं का आकलन करने तथा प्रगति की निगरानी के लिए संकेतक और साक्ष्य रूपरेखा विकसित करने पर केन्द्रित होंगे। चर्चाओं में यह भी शामिल होगा कि निगरानी, मूल्यांकन, जवाबदेही और सीखना किस प्रकार अनुकूलनशील प्रबंधन और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकते हैं।
कार्यशाला से परिणाम-उन्मुख अनुसंधान योजना के लिए संस्थागत क्षमता मजबूत होने और अनुसंधान निवेश को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने वाली एक सुसंगत रूपरेखा के विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैज्ञानिक आउटपुट मत्स्य क्षेत्र और समाज के लिए मापनीय लाभों में परिवर्तित हों।
डॉ. जॉर्ज निनान, निदेशक, भाकृअनुप-सिफ्ट और डॉ. निकिता गोपाल, प्रमुख, विस्तार, सूचना एवं सांख्यिकी प्रभाग, भाकृअनुप-सिफ्ट ने भी उद्घाटन सत्र के दौरान सभा को संबोधित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान, कोच्चि)







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