18 सितंबर, 2026, पुणे
महाराष्ट्र की पहली मुरेल हैचरी का आज पुणे जिले के अंबेगांव तालुका के कानसे स्थित भीमाशंकर फिशरीज में उद्घाटन डॉ. एन.पी. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई, ने राज्य मत्स्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया।
उद्घाटन “सतत आजीविका के लिए मुरेल मछली प्रजनन और पालन” विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान किया गया। हैचरी की स्थापना महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से भाकृअनुप-सिफे, मुंबई के तकनीकी मार्गदर्शन में की गई है।

एनएएसएफ-सीसीएफ-युवा वैज्ञानिक परियोजना (वाईएसपी) के तहत, भाकृअनुप-सिफे के वरिष्ठ वैज्ञानिक और उनकी टीम ने जुलाई-अगस्त 2026 के दौरान स्ट्राइप्ड मुरेल (Channa striata) के प्रजनन और बीज उत्पादन के परीक्षण किए। प्रेरित प्रजनन के लिए उन्नत पेप्टाइड-आधारित हार्मोनल फॉर्मूलेशन का उपयोग करते हुए लगभग 2.5 लाख हैचलिंग और 45,000 फिंगरलिंग का सफलतापूर्वक उत्पादन किया गया। अतिरिक्त बीज उत्पादन के लिए आगे के प्रजनन परीक्षण जारी हैं।
कार्यक्रम में प्रजाति विविधीकरण और आजीविका सृजन के लिए एक आशाजनक जलीय कृषि प्रजाति के रूप में मुरेल की क्षमता को रेखांकित किया गया, जिसका कारण इसकी तेज वृद्धि, उपभोक्ता मांग और उच्च बाजार मूल्य है।
पुणे क्षेत्र के लगभग 50 से 60 किसान, जिनके पास फार्म पॉन्ड हैं, लगातार मुरेल फिंगरलिंग की मांग कर रहे थे, लेकिन इसकी उपलब्धता न होने के कारण उनके तालाबों का कम उपयोग हो रहा था और जलीय कृषि उत्पादकता सीमित थी। इस कमी को दूर करने के लिए अब एक समर्पित मुरेल हैचरी का उद्घाटन किया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण फिंगरलिंग की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

यह पहल किसानों की बीज की तत्काल आवश्यकता को पूरा करेगी। हैचरी के उत्पादन से किसान अपने फार्म पॉन्ड का पूर्ण उपयोग कर सकेंगे, मछली उत्पादन बढ़ा सकेंगे और आजीविका सृजन के साथ क्षेत्रीय विविधीकृत जलीय कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को सामूहिक रूप से मजबूत कर सकेंगे।
डॉ. एन.पी. साहू ने इस पहल की सराहना की और महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से पुणे क्षेत्र में मुरेल क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने किसानों और उद्यमियों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग में भाकृअनुप-सिफे की भूमिका पर जोर दिया।

इस हैचरी का उद्घाटन महाराष्ट्र में वैज्ञानिक मुरेल बीज उत्पादन और सतत आजीविका के लिए मुरेल पालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किसानों ने चर्चा सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया और मार्गदर्शन एवं अपार सहयोग के लिए भाकृअनुप-सिफे का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से 80 किसानों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें