11 अक्टूबर 2026, सिरसा, हरियाणा
भाकृअनुप-केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र, सिरसा ने आज “उत्तर क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कपास उत्पादन: उत्पादकता तथा कीट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना” विषय पर छठी हितधारक संवाद बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. बी.आर. कम्बोज, कुलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू), हिसार, ने की तथा डॉ. डी.के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), सह-अध्यक्षता भाकृअनुप तथा डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप, ने की।
डॉ. बी.आर. कम्बोज ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने तथा उभरते कीटों और रोगों से निपटने के लिए नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और अनुसंधान को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिकों और कृषि विस्तार अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय पर जोर दिया कि अनुसंधान-आधारित प्रौद्योगिकियां किसानों तक पहुंचें। उन्होंने किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में किसानों की प्रतिक्रिया के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि वैज्ञानिक सिफारिशों का समय पर प्रसार किसानों को सूचित निर्णय लेने और फसल के प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करेगा।
डॉ. राजबीर सिंह ने किसानों की आजीविका में सुधार के उद्देश्य से भारत सरकार की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रभावी विस्तार कार्यक्रमों, किसान प्रशिक्षण और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक क्षेत्र-स्तरीय समाधानों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. डी.के. यादव ने कपास उत्पादकता पर राष्ट्रीय मिशन के महत्व पर प्रकाश डाला, जो 2026–27 से 2030–31 तक पांच वर्षों की पहल है और इसके लिए लगभग ₹5,800 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है। यह मिशन 14 राज्यों के 140 जिलों को कवर करता है और इसमें उन्नत प्रौद्योगिकियों के 23.71 लाख प्रदर्शनों तथा लगभग 28,000 किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों की परिकल्पना की गई है। इसके प्रमुख हस्तक्षेपों में अधिक उपज देने वाली तथा कीटों और रोगों के प्रति प्रतिरोधी कपास की किस्मों और संकरों को बढ़ावा देना, सूक्ष्म सिंचाई, उच्च घनत्व रोपण प्रणाली, कृषि मशीनीकरण और उन्नत फसल उत्पादन प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

उन्होंने कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, किसानों के खेतों में प्रमाणित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने नकली बीजों और उर्वरकों के प्रसार पर अंकुश लगाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
डॉ. एस.के. वर्मा, प्रभारी प्रमुख एवं प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-सीआईसीआर क्षेत्रीय केन्द्र, सिरसा, ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और उत्तर भारत में कपास की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ उत्तर क्षेत्र में फसल उत्पादन, उत्पादकता और कीट प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
डॉ. वी.एन. वाघमारे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईसीआर, नागपुर, ने कपास की खेती में प्रमुख बाधाओं पर प्रकाश डाला तथा कपास के क्षेत्रफल का विस्तार करने, उत्पादकता में सुधार करने तथा कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कपास उत्पादन में सुधार के लिए भाकृअनुप-सीआईसीआर और कपास पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी ऑन कॉटन) द्वारा विकसित एवं सत्यापित प्रौद्योगिकियों के प्रसार और एकीकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कपास उत्पादकता पर राष्ट्रीय मिशन 2026–31 के तहत भागीदार संस्थानों और केंद्रों द्वारा अनुसंधान गतिविधियों के कार्यान्वयन पर भी जोर दिया।
बैठक में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. ए.एस. दत्त, अनुसंधान निदेशक, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना; डॉ. राजबीर गर्ग, अनुसंधान निदेशक, सीसीएसएचएयू, हिसार के; डॉ. एन.के. शर्मा, अनुसंधान निदेशक, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू), बीकानेर; डॉ. आर.पी. सिहाग, अतिरिक्त कृषि निदेशक, हरियाणा सरकार; तथा संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) शामिल थे। बैठक में वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) और राज्य कृषि विभागों के अधिकारियों, निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों, जिनर्स एवं कृषि आदान विक्रेताओं तथा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के किसानों ने भी भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें