भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के तहत स्वच्छता, सफाई मित्रों की गरिमा तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाया आगे

भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के तहत स्वच्छता, सफाई मित्रों की गरिमा तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाया आगे

21 अक्टूबर, 2026, बैरकपुर

संस्थागत स्वच्छता, पर्यावरणीय स्थिरता और सफाई कर्मचारियों की गरिमा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, ने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के उद्देश्यों की दिशा में अपनी पहलों के हिस्से के रूप में आज ‘सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया।

सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर में स्वच्छ, स्वास्थ्यकर तथा स्वस्थ संस्थागत परिवेश बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया गया। इस पहल में उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और गरिमा के महत्व पर जोर दिया गया और इस बात की पुनः पुष्टि की गई कि सफाई कर्मचारी स्वच्छता के सामूहिक मिशन में आवश्यक भागीदार हैं। इसने महात्मा गांधी के उन आदर्शों को भी प्रतिध्वनित किया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और स्वच्छता बनाए रखने में लगे प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में राष्ट्र निर्माण तथा स्वच्छ, स्वस्थ एवं स्वास्थ्यकर वातावरण बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों (सफाई मित्रों) के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छता केवल हमारे बाहरी परिवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक शुद्धता, अनुशासन और जिम्मेदार व्यवहार भी शामिल हैं। उन्होंने सभी से सफाई कर्मचारियों के समर्पण को पहचानने और उनकी गरिमा, खुशहाली और कल्याण को बनाए रखने का आग्रह किया।

डॉ. डे ने स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर जोर दिया और संस्थान के सफाई कर्मचारियों के कल्याण तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने लोगों, पशुओं और पर्यावरण की खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता बनाए रखने और बीमारियों के प्रसार को रोकने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

ICAR-CIFRI, Barrackpore Advances Cleanliness, Dignity of Safai Mitras and Environmental Sustainability under Swachhata Special Campaign 6.0

पहल के हिस्से के रूप में, स्वस्थ खान-पान की आदतों को प्रोत्साहित करने और उनकी समर्पित सेवा को मान्यता देने के लिए सफाई मित्रों को फलों की टोकरियां वितरित की गईं। उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा के लिए दस्ताने, मास्क और साबुन सहित व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री भी प्रदान की गई। इस पहल ने उनके आवश्यक योगदान के प्रति संस्थान की सराहना को दर्शाया और इस संदेश को मजबूत किया कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी और स्वस्थ समाज की आधारशिला है।

स्वच्छता पहल के पूरक के रूप में, ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत भविष्य के लिए हरियाली को पोषित करने के महत्व को बढ़ावा दिया। इस पहल ने हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित करने में वृक्षारोपण की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रकृति मां के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया।

यह कार्यक्रम स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप था, जिसमें कार्यस्थल की स्वच्छता में सुधार, सार्वजनिक स्थानों को स्वास्थ्यकर बनाए रखने, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से स्वच्छता की संस्कृति को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसने स्वच्छता पद्धतियों को समयबद्ध अभियानों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी संस्थागत आदतों में बदलने के महत्व को भी मजबूत किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत एक प्रमुख मत्स्य अनुसंधान संस्थान के रूप में, भाकृअनुप- सीआईएफआरआई यह मानता है कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और संस्थागत प्रगति को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और सभी के लिए गरिमापूर्ण कार्यस्थल के साथ-साथ चलना चाहिए। इन पहलों के माध्यम से संस्थान ने स्वच्छ भारत और विकसित भारत के व्यापक राष्ट्रीय विजन में योगदान देते हुए एक स्वच्छ, हरित और अधिक समावेशी संस्थागत वातावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम ने स्वच्छता, सफाई मित्रों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर स्वस्थ एवं अधिक सतत भविष्य बनाने के लिए स्वच्छता को एक स्थायी संस्थागत प्रतिबद्धता बनाने के आईसीएआर-सीआईएफआरआई के संकल्प की पुनः पुष्टि की।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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