भाकृअनुप ने अपने संस्थानों के प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों की कि समीक्षा

भाकृअनुप ने अपने संस्थानों के प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों की कि समीक्षा

30 नवंबर, 2025, देहरादून

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने आज भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, में अपने संस्थानों की पहली जोनल मीटिंग आयोजित की। मीटिंग की अध्यक्षता डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने की, जिन्होंने भाग लेने वाले नौ भाकृअनुप संस्थानों की प्रगति, उपलब्धियों और चल रही पहलों की समीक्षा की। डॉ. जाट ने उभरती राष्ट्रीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भाकृअनुप संस्थानों में अधिक सहयोग, तालमेल बनाने, प्रतिभा को बढ़ावा देने तथा कौशल बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

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डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (एनआरएम), भाकृअनुप ने विभिन्न एसएमडी के सहायक महानिदेशकों, निदेशक (कार्मिक), निदेशक (वित्त), मुख्य सतर्कता अधिकारी, नौ संस्थानों के निदेशकों तथा उनके प्रशासनिक एवं वित्त अधिकारियों के साथ चर्चा में भाग लिया।

चर्चाएं मुख्य प्रशासनिक और वित्तीय मामलों, परिचालन कमियों की पहचान तथा परिषद के भीतर शासन तंत्र एवं समग्र दक्षता को मजबूत करने के लिए रणनीतियों के विकास पर केन्द्रित थी।

खरीद चुनौतियों, जीईएम से संबंधित बाधाओं, संविदात्मक सेवा मामलों और अन्य प्रशासनिक एवं वित्तीय चिंताओं सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में भाकृअनुप के डिवीजनों और व्यक्तिगत संस्थानों दोनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। एजेंडे के हिस्से के रूप में स्थापना, संपत्ति प्रबंधन, कानूनी मामलों और सतर्कता से संबंधित मामलों पर भी विचार किया गया।

दोपहर के सत्र में, डॉ. जाट और डॉ. नायक ने भाकृअनुप–आईआईएसडब्ल्यूसी की विशेष समीक्षा की, तथा इसके वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के साथ बातचीत की।

डॉ. एम. मधु, निदेशक, भाकृअनुप–आईआईएसडब्ल्यूसी, ने पिछले पांच वर्षों में संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं प्रगति को प्रस्तुत किया। नेतृत्व ने संस्थान के पाँच-वर्षीय विज़न और भविष्य के रोडमैप को तैयार करने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

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बैठक में नई दिल्ली और अन्य भाकृअनुप संस्थानों से लगभग 60 वरिष्ठ भाकृअनुप अधिकारियों के साथ-साथ भाकृअनुप–आईआईएसडब्ल्यूसी से लगभग 100 वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से भाग लिया।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले संस्थानों में: भाकृअनुप–आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून (एनआरएम); भाकृअनुप–वीपीकेएएस, अल्मोड़ा (फसल विज्ञान); भाकृअनुप–डीसीएफआर, भीमताल (मत्स्य विज्ञान); भाकृअनुप–सीआईआरसी, मेरठ (पशु विज्ञान); भाकृअनुप–आईआईएफएसआर, मोदीपुरम (एनआरएम); भाकृअनुप–आवीआरआई, बरेली (पशु विज्ञान); भाकृअनुप–सीपीआरआई, मेरठ (पशु विज्ञान); भाकृअनुप– सीपीआरआई, शिमला (बागवानी विज्ञान); और भाकृअनुप–डीएमआर, सोलन (बागवानी विज्ञान), शामिल थे।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, देहरादून)

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