फसल विज्ञान


फसल विज्ञान 
फसल विज्ञान प्रभाग, भाकृअनुप का सबसे बड़ा प्रभाग है, जो उच्च उपज देने वाली फसल किस्मों के विकास हेतु अनुसंधान कार्यक्रम संचालित करता है। इसके अंतर्गत एक डीम्ड विश्वविद्यालय, 21 राष्ट्रीय संस्थान, तीन ब्यूरो, दो परियोजना निदेशालय, दो राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र, 25 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएँ (एआईसीआरपी), अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजनाएँ (एआईएनपी) तथा सात अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। इनके 731 केन्द्र विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों, केन्द्रीय एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (सीएयू /एसएयू) में स्थित हैं।
उपरोक्त सभी संस्थानों/ एआईसीआरपी/एआईएनपी/अन्य परियोजनाओं को छह प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

  1. मूलभूत एवं रणनीतिक अनुसंधान तथा शिक्षा।
  2. पादप आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, बीज एवं पर्वतीय कृषि।
  3. खाद्य एवं चारा फसलों का आनुवंशिक सुधार।
  4. दलहन एवं तिलहन फसलों का सुधार।
  5. आनुवंशिक लाभ हेतु वाणिज्यिक फसलों का सुधार।
  6. कीट एवं सूक्ष्मजीव संसाधन, पादप संरक्षण तथा परागणकर्ता अनुसंधान।

फसल विज्ञान प्रभाग, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर 85 फसलों पर कार्य कर रहा है तथा अब तक विभिन्न फसलों की कुल 5800 किस्में जारी की जा चुकी हैं।
मई 2014 से 2022 तक, भाकृअनुप के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) द्वारा खेती फसलों की 1956 उच्च उपज देने वाली एवं तनाव-सहनशील किस्में/संकर जारी किया गया। इनमें 924 अनाज फसलें (धान 442, गेहूं 127), 291 तिलहन, 304 दलहन, 239 रेशा/वाणिज्यिक फसलें, 118 चारा फसलें, 64 गन्ना तथा 16 अन्य फसलें शामिल हैं, जिन्हें देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है।
दृष्टि (Vision)
विज्ञान-आधारित ज्ञान का सृजन कर नवाचारी प्रौद्योगिकियों तथा किस्मों/उत्पादों का विकास करना, ताकि सतत खाद्य, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 
मिशन (Mission)
भारत को भूख एवं कुपोषण से मुक्त बनाना। 
अधिदेश (Mandate) 
• विविध कृषि-परिस्थितियों एवं परिस्थितिजन्य आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत फसल किस्मों/संकरों के विकास तथा दक्ष, किफायती, पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत फसल उत्पादन एवं संरक्षण प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु पारंपरिक एवं आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान, उपकरणों तथा अत्याधुनिक विज्ञान का उपयोग करना; साथ ही मूलभूत, रणनीतिक एवं भावी फसल विज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना।
• बीज उत्पादन प्रौद्योगिकियों का परिष्करण तथा संकर किस्मों पर विशेष बल देते हुए ब्रीडर बीज का उत्पादन।
• पौधों, कीटों एवं अन्य अकशेरुकी जीवों तथा कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीवों के आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग।
• फसल विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान-आधारित परामर्श एवं सलाहकार सेवाएँ प्रदान करना।

 

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