भाकृअनुप नागालैंड केन्द्र ने अधिक उत्पादकता तथा जलवायु सहनशीलता के लिए धान की सात नई किस्मों का किया प्रदर्शन

भाकृअनुप नागालैंड केन्द्र ने अधिक उत्पादकता तथा जलवायु सहनशीलता के लिए धान की सात नई किस्मों का किया प्रदर्शन

8 अक्टूबर, 2026, मेडजिफेमा

भाकृअनुप पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, नागालैंड केन्द्र ने आज आयोजित किसान फील्ड दिवस के दौरान धान की सात नव विकसित किस्मों का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर किसानों तथा कृषि अधिकारियों को नागालैंड की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए इन किस्मों के प्रदर्शन एवं उपयुक्तता का आकलन करने का अवसर मिला।

राज्य बीज उप-समिति द्वारा अप्रैल 2026 में जारी करने के लिए अनुमोदित इन किस्मों की अवधि कम, जलवायु-सहनीयता और रोग-सहनशीलता वाली है। इनकी परिपक्वता अवधि 115–120 दिन तथा उपज क्षमता 5–7 टन प्रति हैक्टर है। इनमें ब्लास्ट रोग के प्रति सहनशीलता और नमी के तनाव के प्रति मध्यम सहनशीलता भी है। इन किस्मों को राज्य में धान किसानों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों, जिनमें फसल की लंबी अवधि, नमी का तनाव तथा रोगों और कीटों से होने वाली क्षति शामिल हैं, का समाधान करने के लिए विकसित किया गया है।

किसान फील्ड दिवस में 56 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें सोविमा, हेनवी, चुमौकेदिमा, धनसिरीपार और सिंगरीजन के किसान, कृषि विभाग के अधिकारी, आईसीएआर नागालैंड केन्द्र के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) के अधिकारी शामिल थे।

ICAR Nagaland Centre Showcases Seven New Rice Varieties for Higher Productivity and Climate Resilience

क्षेत्र भ्रमण के दौरान सातों किस्मों की विशेषताओं और प्रदर्शन के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इनका विकास प्रमुख उत्पादन बाधाओं को दूर करने और स्थानीय परिस्थितियों में धान की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। ये किस्में नौ वर्षों से अधिक समय के अनुसंधान का परिणाम हैं, जिसके दौरान क्षेत्र के लिए उपयुक्त अधिक उपज देने वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की पहचान के लिए लगभग 990 प्रजनन लाइनों का मूल्यांकन किया गया।

जिन किसानों ने पहले ही कुछ किस्मों की खेती की थी, उन्होंने इनके प्रदर्शन और उपज संबंधी विशेषताओं के बारे में उत्साहजनक अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने खेतों में इनके प्रदर्शन को देखने के बाद इन किस्मों को अपनाने में रुचि व्यक्त की।

नागालैंड सरकार के कृषि विभाग की संयुक्त सचिव, श्रीमती लिमानेनला ने किसानों को उन्नत किस्मों को अपनाने और कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित वैज्ञानिक नवाचारों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इनकी कम अवधि, अधिक उपज क्षमता और तनाव-सहनशीलता से किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन लेने, बेहतर फसल प्रणालियों के लिए अवसर पैदा करने तथा कृषि आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कृषि विभाग और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से पूरे राज्य में इनके व्यापक प्रसार को सुगम बनाने का भी आह्वान किया।

डॉ. एच. कलिता, क्षेत्रीय केन्द्र प्रमुख, भाकृअनुप नागालैंड केन्द्र, ने अनुसंधान केन्द्रों से किसानों के खेतों तक उन्नत प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने धान आधारित कृषि प्रणालियों की दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने में कम अवधि वाली धान की किस्मों की भूमिका को रेखांकित किया।

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चुमौकेदिमा की जिला कृषि अधिकारी, सुश्री मोआइएनला पोंगेन ने किस्मों के प्रदर्शन की सराहना की और किसानों को इन्हें अपनाने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादन परिस्थितियों के अनुकूल उन्नत किस्में किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।

कृषि उप निदेशक, श्री डेविड अवोमी ने भी किसानों के साथ बातचीत की और अधिक उपज देने वाली तथा तनाव-सहनशील किस्मों की धान उत्पादन, कृषि आय और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने की क्षमता पर प्रकाश डाला।

इससे पहले, सात किस्मों को जारी करने के लिए राज्य बीज उप-समिति की बैठक 21 अप्रैल, 2026 को निर्धारित किस्म जारी करने की प्रक्रियाओं के अनुसार भाकृअनुप नागालैंड केन्द्र, मेडजिफेमा में आयोजित की गई थी। जारी करने की मंजूरी नागालैंड सरकार की संयुक्त सचिव, श्रीमती लिमानेनला और नागालैंड सरकार के कृषि सलाहकार, श्री म्हाथुंग यानथन द्वारा दी गई।

श्री म्हाथुंग यानथन ने वैज्ञानिक समुदाय के प्रयासों की सराहना की और इस विकास को नागालैंड में कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने किसानों के समुदायों को ठोस लाभ सुनिश्चित करने के लिए किस्मों के प्रभावी प्रसार और अपनाने हेतु विभागों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह पहल भाकृअनुप नागालैंड केन्द्र के स्थानीय उत्पादन चुनौतियों का समाधान करने, जलवायु सहनशीलता को मजबूत करने तथा क्षेत्र के किसानों के लिए अधिक उत्पादकता और बेहतर आजीविका का समर्थन करने वाली उन्नत धान की किस्मों को विकसित और बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

(स्रोत: भाकृअनुप पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, नागालैंड केन्द्र)

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