भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी ने पूर्वी चंपारण, बिहार में खेत बचाओ अभियान – रबी 2026 का किया शुभारंभ

भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी ने पूर्वी चंपारण, बिहार में खेत बचाओ अभियान – रबी 2026 का किया शुभारंभ

22 अक्टूबर 2026, मोतिहारी, बिहार

भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान (एमजीआईएफआरआई), मोतिहारी, बिहार ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए पूर्वी चंपारण जिले के कोटवा प्रखंड की जसौली पट्टी ग्राम पंचायत में खेत बचाओ अभियान (केबीए) – रबी 2026 का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में 57 किसानों और स्थानीय हितधारकों ने भाग लिया।

अभियान का उद्देश्य किसानों के बीच वैज्ञानिक रबी फसल योजना, फसल विविधीकरण, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, संसाधनों के कुशल उपयोग और सतत फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करना था। भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई के वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद किया और कृषि उत्पादकता बढ़ाने, इनपुट लागत कम करने और आत्मनिर्भर कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक सिफारिशें साझा कीं।

ICAR–MGIFRI, Motihari Launches Khet Bachao Abhiyan – Rabi 2026 in East Champaran, Bihar

डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई, ने फसलों, बागवानी, पशुधन, मत्स्य पालन तथा अन्य कृषि उद्यमों को एकीकृत करके आर्थिक रूप से व्यवहार्य और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों के पुनर्चक्रण, महंगे बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम करने और स्थान-विशिष्ट एकीकृत कृषि मॉडल अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक नवाचारों और बेहतर कृषि प्रबंधन पद्धतियों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

तकनीकी सत्रों में मृदा उर्वरता को बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड-आधारित सिफारिशों, संतुलित उर्वरक प्रयोग और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। किसानों को उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने और कृषि प्रणालियों में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष और जैव उर्वरकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। मृदा स्वास्थ्य में सुधार और खेती की लागत कम करने में दलहनी फसलों तथा विविधीकृत फसल प्रणालियों की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

वैज्ञानिकों ने बेहतर रबी फसल योजना पर परामर्श दिया और गेहूं, मक्का, सरसों और दलहनी फसलों के लिए अनुशंसित उत्पादन पद्धतियों की जानकारी दी। चर्चाओं में उपयुक्त फसल किस्मों, समय पर बुवाई, बीज उपचार, इष्टतम बीज दर, सिंचाई निर्धारण और खरपतवार प्रबंधन को शामिल किया गया। किसानों को संरक्षण कृषि, शून्य जुताई प्रौद्योगिकियों और मल्चिंग, कम्पोस्टिंग तथा मिट्टी में फसल अवशेष मिलाने सहित उपयुक्त फसल अवशेष प्रबंधन पद्धतियों के बारे में भी जागरूक किया गया, ताकि अवशेष जलाने को हतोत्साहित किया जा सके और संसाधन-उपयोग दक्षता में सुधार हो सके।

कार्यक्रम में कटाई के बाद के प्रबंधन पर भी चर्चा की गई, जिसमें नुकसान को कम करने और कृषि आय बढ़ाने के लिए उचित सुखाई, ग्रेडिंग, सुरक्षित भंडारण और मूल्य संवर्धन शामिल थे। आय के स्रोतों में विविधता लाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के साधन के रूप में बागवानी फसलों और पशुधन-आधारित उद्यमों के एकीकरण पर प्रकाश डाला गया।

‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत आंवला, अमरूद, अनार और जामुन सहित 60 फलदार पौधे भाग लेने वाले किसानों के बीच वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण, घरेलू पोषण सुरक्षा और खेत तथा घर के आसपास उपलब्ध स्थानों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना था। किसानों को अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने और उचित देखभाल एवं संरक्षण के माध्यम से उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

ICAR–MGIFRI, Motihari Launches Khet Bachao Abhiyan – Rabi 2026 in East Champaran, Bihar

किसान–वैज्ञानिक संवाद ने प्रतिभागियों को मृदा उर्वरता, उर्वरक प्रबंधन, फसल स्थापना, सिंचाई और बढ़ती इनपुट लागत से संबंधित क्षेत्र-स्तरीय चुनौतियों को साझा करने का अवसर प्रदान किया। वैज्ञानिक दल ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया और किसानों को स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल उन्नत पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस शुभारंभ के साथ खेत बचाओ अभियान – रबी 2026 के तहत आईसीएआर–एमजीआईएफआरआई की क्षेत्र-स्तरीय गतिविधियों की शुरुआत हुई। संबंधित कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), राज्य कृषि विभाग और अन्य हितधारकों के समन्वय से बहुविषयक टीमों के माध्यम से आगे गांव-स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम, किसान संवाद और क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

यह पहल पूर्वी भारत में सुदृढ़ कृषि और किसानों की बेहतर आजीविका के लिए स्वस्थ मृदा, संतुलित उर्वरीकरण, फसल विविधीकरण और सतत, आत्मनिर्भर कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के संस्थान के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)

×