भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने पुणे के कालुस गाँव में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत जागरूकता एवं प्रदर्शन अभियान का आयोजन किया

भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने पुणे के कालुस गाँव में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत जागरूकता एवं प्रदर्शन अभियान का आयोजन किया

10 जून, 2026, पुणे

चल रहे खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत, भाकृअनुप-फ्लोरीकल्चरल रिसर्च निदेशालय (भाकृअनुप-डीएफआर), पुणे, के वैज्ञानिकों की एक बहु-विषयक टीम ने महाराष्ट्र राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों के सहयोग से आज पुणे के कालुस गाँव में एक जागरूकता एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में बेहतर फसल स्वास्थ्य एवं उत्पादकता के लिए टिकाऊ और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। जागरूकता सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा उर्वरता बनाए रखने और फसल वृद्धि को बढ़ावा देने में जैव उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूक किया। वैज्ञानिकों ने कृषि पारितंत्रों में प्राकृतिक शत्रुओं के महत्व तथा जैविक कीट नियंत्रण में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

टीम ने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए विवेकपूर्ण कीट नियंत्रण उपाय अपनाने में सहायता प्रदान करने के लिए समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएस) रणनीतियों तथा कीटनाशी प्रतिरोध प्रबंधन (आईआरएमॉ) पद्धतियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

ICAR-DFR, Pune Organises Awareness and Demonstration Drive under Khet Bachao Abhiyan at Kalus Village, Pune

क्षेत्रीय प्रदर्शन गतिविधियों के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब) के प्रबंधन हेतु प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप) के उपयोग का प्रदर्शन किया तथा उनकी स्थापना, संचालन और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से कृषि क्षेत्रों में कीट आबादी को कम करने में उनकी प्रभावशीलता के बारे में जानकारी दी।

इस कार्यक्रम का संयुक्त समन्वयन महाराष्ट्र राज्य कृषि विभाग तथा भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे की टीम द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में कुल 32 प्रतिभागियों, जिनमें 3 महिला किसान शामिल थीं, ने भाग लिया और फसल संरक्षण तथा टिकाऊ खेती के व्यावहारिक समाधान को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों के साथ सक्रिय संवाद किया।

इस कार्यक्रम ने लचीली तथा टिकाऊ कृषि के लिए खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत किसान पहुँच एवं वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार के प्रति आईसीएआर-डीएफआर की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-फ्लोरीकल्चरल रिसर्च निदेशालय, पुणे)

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