भाकृअनुप-आरसी एनईएच, उमियम ने सतत कृषि के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा किसानों को जोड़ने पर कार्यशाला का किया आयोजन

भाकृअनुप-आरसी एनईएच, उमियम ने सतत कृषि के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा किसानों को जोड़ने पर कार्यशाला का किया आयोजन

उमियम, मेघालय

भाकृअनुप उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सतत कृषि विकास के लिए कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, विस्तार और कृषक समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श के लिए “सतत कृषि के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और किसानों को जोड़ना” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की।

कार्यशाला में कृषि अनुसंधान, विस्तार और प्रौद्योगिकी प्रसार से जुड़े वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
 

ICAR-RC NEH, Umiam Organises Workshop on Connecting Science, Technology and Farmers for Sustainable Agriculture

मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप, ने प्रभावी कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी प्रसार के लिए संस्थागत तंत्र के रूप में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने भाकृअनुप संस्थानों, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (एटारी), केवीके और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ केवीके की दक्षता, पहुंच और किसान-केन्द्रित कार्यप्रणाली को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सिंह ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विविध कृषि-पारिस्थितिक परिस्थितियों के अनुकूल स्थान-विशिष्ट और जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों के विकास एवं प्रचार के महत्व को भी रेखांकित किया। कृषि उत्पादकता पर जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 49% की महत्वपूर्ण वर्षा कमी का अनुभव किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और लचीलेपन को सुनिश्चित करने के लिए जलवायु-स्मार्ट और पहाड़ी क्षेत्रों के अनुकूल फसलों तथा उत्पादन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. अल्पना दास, प्रभारी निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, जोन VI, गुवाहाटी, ने कृषि विस्तार प्रणाली को मजबूत करने और पूरे क्षेत्र के किसानों तक उपयुक्त कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार को सुगम बनाने में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

ICAR-RC NEH, Umiam Organises Workshop on Connecting Science, Technology and Farmers for Sustainable Agriculture

डॉ. ए.के. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-एटारी, जोन VII, उमियम, ने कृषक समुदायों को मजबूत करने और विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए केवीके, भाकृअनुप संस्थानों तथा अन्य हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, डॉ. जी. कादिरवेल, निदेशक, भाकृअनुप -आरसी एनईएच, उमियम, ने कृषि अनुसंधान संस्थानों और कृषक समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क के रूप में केवीके की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण और मजबूत अनुसंधान–विस्तार–किसान संपर्क की आवश्यकता पर जोर दिया कि अनुसंधान के माध्यम से विकसित प्रौद्योगिकियां प्रभावी रूप से किसानों तक पहुंचें।

डॉ. कादिरवेल ने बागवानी और संबद्ध फसलों से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पाद विकसित करने के लिए एंड-टू-एंड दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे किसानों के लिए अधिक मूल्य सृजित हो और क्षेत्र में कृषि उद्यम मजबूत हों। उन्होंने उत्तर-पूर्वी राज्यों में प्राकृतिक खेती के विस्तार पर संस्थान के ध्यान को रेखांकित किया, जिसका लक्ष्य लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाना है।

ICAR-RC NEH, Umiam Organises Workshop on Connecting Science, Technology and Farmers for Sustainable Agriculture

डॉ. कादिरवेल ने कृषि विस्तार को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अभिनव, गैर-नियोजित योजनाओं की शुरुआत करने में डॉ. राजबीर सिंह के नेतृत्व की सराहना की।

कार्यशाला ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में विज्ञान–प्रौद्योगिकी–किसान संपर्क को मजबूत करने तथा सतत, जलवायु-लचीले और किसान-केन्द्रित कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने हेतु वैज्ञानिकों, विस्तार कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों को एक मंच प्रदान किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम, मेघालय)

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