जलजीव पालन प्रौद्योगिकी द्वारा जनजातियों की आजीविका में बढ़ोतरी

जलजीव पालन प्रौद्योगिकी द्वारा जनजातियों की आजीविका में बढ़ोतरी आदिवासीपारा गांव, हाथखोला (बाली गांव, संख्या 9), गोसाबा ब्लॉक, दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल में जनजातियों की आजीविका में जल जीवपालन प्रौद्योगिकी द्वारा बड़ी सफलता प्राप्त की गई। वर्ष 2019 में इस द्वीप पर आए घातक चक्रवाती तूफान 'एईला' द्वारा काफी बर्बादी हुई थी। तूफान के कारण समुद्र का खारा जल द्वीप के मीठे पानी के तालाबों में आ गया था जिससे जैवविविधता सहित सिंचाई चैनल को काफी हानि पहुंची थी। इस प्रकार के घातक तूफान के बाद द्वीप के निवासियों को खाद्य एवं आजीविका से संबंधित बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जनजातीय आबादी वाले क्षतिग्रस्त द्वीप पर भाकृअनुप – केन्द्रीय ताजा जलजीव पालन संस्थान (सीफा), भुबनेश्वर द्वारा मछली पालन गतिविधियों और आजीविका सहयोग प्रणाली की पुनर्स्थापना से जुड़े कदम उठाए गए। इसके तहत गुणवत्तापूर्ण कार्प बीज, अन्य महत्वपूर्ण आदानों और प्रौद्योगिकी की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे थे। इस द्वीप के जलजीव विकास के लिए सीफा द्वारा सर्वेक्षण कराने के साथ ही तालाब के मृदा एवं जलीय मानदंड का विश्लेषण, मछली जीरा उत्पादन के लिए फाइबर ग्लास रेनफोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) से निर्मित कार्प हैचरी की भी स्थापना की गई। इसके साथ ही एकीकृत और समग्र जलजीव पालन में आवश्यक आदान आपूर्ति हेतु आदिवासीपारा गांव के 51 जनजातीय किसानों को 4.855 हैक्टर क्षेत्र में जलजीव पालन संबंधी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक प्रदर्शन, हितधारकों के लिए नियमित प्रशिक्षण का आयोजन और इस द्वीप के विकास के लिए विभिन्न संसाधन वाले व्यक्तियों और गणमान्यों को भी जोड़ने का कार्य सीफा द्वारा किया गया।

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