सुदृढ़ ब्लू इकोनॉमी के लिए मत्स्य श्रमिक कल्याण को बढ़ावा: भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर में ‘समुद्र संगम’ पहल के तहत हितधारक कार्यशाल का आयोजन

सुदृढ़ ब्लू इकोनॉमी के लिए मत्स्य श्रमिक कल्याण को बढ़ावा: भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर में ‘समुद्र संगम’ पहल के तहत हितधारक कार्यशाल का आयोजन

10 अप्रैल, 2026, बैरकपुर

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआएफआरआई), बैरकपुर, ने आज भाकृअनुप-एनएएसएफ परियोजना ‘भारतीय समुद्री मत्स्य क्षेत्र में रोजगार, आजीविका एवं संसाधन उत्पादकता पर श्रम प्रवासन की बदलती गतिशीलता’ के अंतर्गत समुद्र संगम पहल के तहत मत्स्य श्रमिक कल्याण हेतु हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया।

Advancing Fisher Labour Welfare for a Resilient Blue Economy: ICAR-CIFRI, Barrackpore Hosts Stakeholders’ Workshop under Samudra Sangam Initiative

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. प्रदीप डे, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति में मत्स्य श्रमिकों के कल्याण को केन्द्र में रखना आवश्यक है। उन्होंने मत्स्य श्रमिक कल्याण से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला तथा मत्स्य संस्थानों और कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) की क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सशक्त, दक्ष एवं सामाजिक रूप से सुरक्षित मत्स्य समुदाय ही जलीय संसाधनों को सतत विकास और राष्ट्रीय समृद्धि के इंजन में बदलने के वास्तविक प्रेरक बनेंगे। इसके लिए नीति, व्यवहार तथा जनभागीदारी के प्रभावी समन्वय द्वारा समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा व्यापक विचार-विमर्श किया गया, जिसमें मत्स्य समुदायों से सीधे जुड़े विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों ने जमीनी स्तर की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किया।

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इस कार्यक्रम में पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के तटीय क्षेत्रों से कुल 16 मछुआरों ने सक्रिय भागीदारी की और अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए। कार्यशाला के दौरान श्रमिकों के सामाजिक मानकों से संबंधित आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन भी किया गया, जिससे साक्ष्य-आधारित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए आधार तैयार होगा। इसका उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना और आजीविका में सुधार लाना है।

हितधारकों के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद मंच के रूप में इस पहल ने जमीनी वास्तविकताओं और संस्थागत ढाँचे के बीच सेतु निर्माण की प्रतिबद्धता को मजबूत किया, ताकि मत्स्य श्रमिक समुदाय भारत की सुदृढ़, समावेशी और सतत ब्लू इकोनॉमी की यात्रा के केंद्र में बना रहे।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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