भाकृअनुप द्वारा वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह

6 दिसंबर, 2016, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन 6 दिसंबर, 2016 को एनएएससी, परिसर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी, सांसद एवं संयोजक, संसदीय राजभाषा समिति, मुख्य अतिथि तथा डॉ. लीलाधर मंडलोई, पूर्व महानिदेशक, आकाशवाणी एवं सुप्रसिद्ध कवि विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुए।

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इस अवसर पर डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक भाकृअनुप ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्रयोगशालाओं के अनुसंधान, विकास कार्य, प्रयोग तथा इनसे संबंधित विवरण किसानों तक किसानों की भाषा में पहुंचाई जानी चाहिए। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु राजभाषा एक सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा वैज्ञानिक अपनी बातें किसानों तक पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विचार की अभिव्यक्ति भाषा के माध्यम से होती है जो सरल होनी चाहिए। डॉ. महापात्र ने कहा कि देश में कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है तथा खाद्यान्न आत्मनिर्भरता के साथ ही हमारा देश कृषि उत्पादों का निर्यातक भी बन चुका है। इसके साथ ही उन्होंने संसदीय राजभाषा समिति के संयोजक को आश्वस्त किया कि परिषद राजभाषा निर्देशों के अनुसार कार्य कर रही है जिसमें पहले की तुलना में काफी सुधार होने के साथ ही तेजी से कार्य हुआ है। उदाहरणस्वरूप उन्होंने बताया कि 7 क्षेत्रीय समितियों की बैठक में से 6 बैठक के सभी कार्यकलाप पूर्णतः हिन्दी में किए गए जो एक सकारात्मक कदम है।

इस अवसर पर डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी, सांसद ने अपने संबोधन में राजभाषा के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दी एक सशक्त भाषा है जो अभिव्यक्ति के सभी मानदंडों पर खरी उतरती है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. लीलाधर मंडलोई ने कहा कि कार्यालयों में हिन्दी में कार्य को सुनिश्चित करने के लिए सर्वप्रथम कर्मचारियों को प्रेरित करना चाहिए जिससे वे अपनी रुचि से राजभाषा में कार्य कर सकें।  

परिषद द्वारा ‘हिन्दी चेतना मास’ के दौरान हिन्दी को बढ़ावा देने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इसके तहत प्रश्न मंच, हिन्दी निबंध, हिन्दी टिप्पण, काव्य पाठ, आशुभाषण, वाद-विवाद, हिन्दी टंकण, शब्द परिचय प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा वर्ष भर हिन्दी में कार्य करने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए। ये पुरस्कार डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी द्वारा वितरित किए गए।

(स्रोतः हिन्दी सम्पादकीय एकक, डीकेएमए)