कृषि अभियांत्रिकी संभाग

कृषि अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी की कृषि में उत्पादकता और लाभ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके 5 प्रमुख क्षेत्र हैं-
(1) कृषि मशीनीकरण (2) कटाई उपरांत संरक्षण और मूल्य संवर्धन (3) सिंचाई और निकासी अभियांत्रिकी (4) ऊर्जा प्रबन्धन (5) सूचना प्रौद्योगिकी। इस संभाग के 6 संस्थान, 6 अखिल भारतीय अनुसंधान परियोजनाएं, 30 तदर्थ योजनाएं और 18 रिवाल्विंग फंड योजनाएं हैँ।

महत्वपूर्ण क्षेत्र

  • समयबद्ध और दक्ष कृषि क्रियाओं को करने के लिए उचित यांत्रिक पद्धतियों और रणनीतियों का विकास
  • शुष्क भूमि खेती, पहाड़ी क्षेत्रों में खेती, पशुपालन और मात्स्यिकी के लिए यांत्रिक पद्धतियों का विकास
  • कृषि क्रियाओं में अड़चनों को दूर करके कार्य दक्षता को बढ़ाना
  • कृषक महिलाओं के लिए उपयुक्त औजारों और मशीनों का विकास
  • कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण कार्यकलापों में ऊर्जा प्रबन्धन, जैव ईंधन का प्रयोग और गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का उपयोग
  • कटाई उपरांत नुकसान को कम करना, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, कृषि अवशेषों का उपयोग और उपोत्पाद का प्रशोधन

उपलब्धियां

  • दक्ष कृषि संचालनों और संसाधन संरक्षण के लिए कृषि मशीनों का विकास जैसे- लेज़र भूमि समतलीकरण, सैल्फ-प्रोपेल्ड स्प्रेयर, धान बीजक, सब्जी रोपक, गन्ना रोपक आदि
  • कृषक महिलाओं की मशक्कत कम करने के लिए दक्ष फार्म मशीनों का विकास और कृषि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए संस्तुतियां और कृषि यंत्रों का विकास
  • सौर रेफ्रीजरेटर; कम लागत सौर कुकर और वाटर हीटर में पुर्ननवीकरण ऊर्जा प्रौद्योगिकी का विकास; उच्च क्षमतायुक्त स्टोव; गैसीफायर, फसल अवशेषों से तरल ईंधन; कम लागत के बायोगैस प्लांट, कृषि अवशेषों का जैवीय उपयोग; पशु चालित कृषि प्रसंस्करण ईकाईयां, कृषि अवशेषों के प्रयोग हेतु बैल चालित जनरेटर और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य पुर्ननवीकरण ऊर्जा स्रोत।
  • कटाई उपरांत नुकसान को कम करने और मूल्य वर्धन के लिए क्षेत्रीय और समुदाय विशेष उपकरण और प्रसंस्करण विकसित।
  • सोयाबीन छिलका उतारना; सोयानट; सोया फ्लेक मशीन, सोया स्नैक, कुटीर सोया-पनीर प्लांट; सोया आधारित खाद्य उत्पाद; सोया आटा और तेल के लिए पायलट प्लांट; भिंडी युक्त सोया खाद्यान्न स्नैक्स।
  • जूट प्लांट रिबनर विकसित; जूट कताई को पर्यावरण हितैषी किया, क्वालिटी जांच के लिए कच्चे जूट की ग्रेडिंग; जियोटैक्सटाईल; जूट स्टिक पार्टिकल बोर्ड का निर्माण, जूट कृषकों की आय बढ़ाने और जूट के विविध उपयोग के लिए किया गया।
  • कपास गिनिंग, दृढ़ता जांच, कपास रेशे की शुद्धता जांचने के लिए न्यूरॉल नेटवर्क, विविध स्पीड डबल रोलर; उन्नत माइक्रो स्पिनिंग पद्धति; कपड़ों के लिए अग्नि रिडारडेशन फिनिश; कॉटन कोयर कम्पोजिट, कागज़ के लिए गूदा, कपास पौधों के तनो से पार्टिकल बोर्ड और कोरोगेटिड बॉक्स; टैक्सटाइल मिल अवशेषों से बायोगैस बनाने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित।
  • नये लाख परपोषी की पहचान; लाख कीटों का आण्विक विश्लेषण; श्रेष्ठ लाख पंक्तियां विकसित; लाख कीट प्रबन्धन।
  • शैलेक तैयार करने; ब्लीच लाख; वैक्स रहित, रंगहीन लाख; लाख रंग और वैक्स लाख फैक्ट्री अवशेषों से; सुगंधित तत्व; कुसुम की पंखुड़ियों से प्राकृतिक रंग और हर्बल चाय; फलों और सब्जियों को देर तक ताज़ा रखने के लिए लाख वैक्स आधारित इमल्शन का विकास।
  • सतही, उप सतही और उर्ध्व निकासी; बोरवैल के जरिए कृत्रिम भू-जल रिचार्ज; कूंड सिंचाई हेतु स्वचालित बहाव प्रणाली का विकास।
  • राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पद्धति के संस्थानों में कृषि अनुसंधान सूचना प्रणाली (एरिस) का सृजन और सुदृढ़ीकरण

संपर्क


डा. एम.एम. पांडे, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी)
कृषि अभियांत्रिकी संभाग, कृषि अनुसंधान भवन - II, नई दिल्ली - 110 012 भारत
फोनः (कार्यालय) 91-11-25843415 फैक्सः 91-11-25842660
ई-मेलः mmpandey@icar.org.in