भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने टिकाऊ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु हरी खाद एवं बायोमास पुनर्चक्रण को दिया बढ़ावा

भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने टिकाऊ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु हरी खाद एवं बायोमास पुनर्चक्रण को दिया बढ़ावा

20 अप्रैल, 2026, गोवा

भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा, तथा भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा, ने आज उत्तर गोवा के पेरनेम स्थित दादाचीवाड़ी में हरी खाद तथा बायोमास पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने हेतु एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी देना था, जिससे मृदा उर्वरता में सुधार हो, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और मृदा स्वास्थ्य बना रहे।

एक विशेषज्ञ ने गोवा की कृषि में हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डाला तथा विभिन्न कम्पोस्टिंग विधियों के माध्यम से बायोमास पुनर्चक्रण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों से दीर्घकाल में मृदा स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिलता है।

ICAR-CCARI, Goa Promotes Green Manuring and Biomass Recycling for Sustainable Soil Health Management

दूसरे विशेषज्ञ ने किसानों को अजोला उत्पादन के बारे में जानकारी दी, जिसे पशुधन के लिए कम लागत वाला पूरक आहार बताया गया। उन्होंने इसके दोहरे लाभों—पशुओं के पोषण में वृद्धि तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में सहयोग—पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में कुल 10 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की, जो स्थानीय किसानों में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती पद्धतियों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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