30 जून, 2026, शिमला
भाकृअनुप-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीपीआरआई), शिमला, ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान ‘खेत बचाओ अभियान’ का एक माह का सफलतापूर्वक समापन किया।
1 जून से 30 जून, 2026 तक संचालित इस अभियान में किसानों एवं अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसने कृषि प्रसार सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा फसल हानि के विरुद्ध किसानों की क्षमता बढ़ाने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
यह अभियान भाकृअनुप-सीपीआरआई मुख्यालय, शिमला तथा पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और मेघालय स्थित इसके क्षेत्रीय केंद्रों में संचालित किया गया। अभियान के दौरान संस्थान ने 100 किसान-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के 5,456 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत टिकाऊ कृषि के प्रमुख घटकों पर भी विशेष बल दिया गया, जिनमें मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के प्रति जागरूकता, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, गुणवत्तायुक्त बीजों का उपयोग, बीज उपचार, हरी खाद, आधुनिक बुवाई तकनीकें तथा जल-कुशल कृषि पद्धतियां शामिल थीं। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उत्पादकता बढ़ाने के लिए जलवायु-अनुकूल तकनीकों एवं वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

डॉ. ब्रजेश सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-सीपीआरआई, शिमला, ने कहा कि किसानों की ओर से मिला अभूतपूर्व सहयोग वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के प्रति उनके बढ़ते विश्वास तथा समय पर खेत-स्तरीय मार्गदर्शन के महत्व को दर्शाता है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से भाकृअनुप-सीपीआरआई ने फसल संरक्षण और टिकाऊ कृषि के लिए व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराकर किसानों के साथ अपने प्रत्यक्ष जुड़ाव को और मजबूत किया है। संस्थान अपने जन-जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि नवीनतम अनुसंधान, तकनीकें और नवाचार किसान समुदाय तक पहुंचें, जिससे अंततः उत्पादकता बढ़े, किसानों की आय में सुधार हो तथा राष्ट्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।”
अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने 178 खेत-स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें उन्नत फसल प्रबंधन पद्धतियों, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, बीज उपचार तकनीकों तथा टिकाऊ कृषि के लिए अन्य वैज्ञानिक हस्तक्षेपों का प्रदर्शन किया गया। जमीनी स्तर पर अधिकतम जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए गांवों और कृषि समूहों में 1,052 बैनर, पोस्टर एवं तख्तियां प्रदर्शित की गईं, जबकि व्यापक डिजिटल जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लगभग 1.5 लाख हितधारकों तक पहुंच बनाई गई।
अभियान के दौरान 17 बहु-विषयक दल, जिनमें भाकृअनुप-सीपीआरआई मुख्यालय, शिमला के छह दल भी शामिल थे, पूरे महीने क्षेत्र में सक्रिय रहे। इन दलों ने गांवों का दौरा किया, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, निदानात्मक सर्वेक्षण किए तथा किसानों के साथ सीधे संवाद कर खेत-स्तरीय समस्याओं का समाधान किया और प्रभावी फसल संरक्षण के लिए समय पर तकनीकी परामर्श प्रदान किया।
‘खेत बचाओ अभियान’ का सफल क्रियान्वयन प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान और किसानों के खेतों के बीच की दूरी को कम करने के प्रति भाकृअनुप-सीपीआरआई की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। वैज्ञानिक विशेषज्ञता को व्यापक क्षेत्रीय पहुंच के साथ जोड़ते हुए संस्थान ने किसानों को ज्ञान, प्रौद्योगिकी और समयबद्ध परामर्श सेवाओं से सशक्त बनाने में अपनी भूमिका को पुनः स्थापित किया है, जिससे एक सुदृढ़, उत्पादक और टिकाऊ कृषि क्षेत्र का निर्माण किया जा सके।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला)







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