30 अप्रैल, 2026, बेंगलुरु
डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप-महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप ने भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान का दौरा किया, जहां उन्होंने संस्थान में विकसित की गई उन्नत सुविधाओं का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं में अत्याधुनिक वीडियो वॉल से सुसज्जित आधुनिक प्रशिक्षण हॉल, नवीनीकृत समिति कक्ष, उन्नत स्वागत कक्ष तथा भाकृअनुप-एनआईवीईडीआई में संचालित आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान अकादमिक हब के विद्यार्थियों के लिए नव विकसित स्नातकोत्तर छात्रावास शामिल हैं।

डॉ. बलदेव आर. गुलाटी, निदेशक, भाकृअनुप-निवेदी ने उप महानिदेशक को पशुधन रोग निगरानी एवं तैयारी को सुदृढ़ करने हेतु संस्थान की रणनीतिक पहलों की जानकारी दी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर फैल रहे खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के SAT-1 सीरोटाइप जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के प्रयासों, बल्क मिल्क आधारित निगरानी, प्रमाणित भैंस मांस प्रणाली तथा विभिन्न राज्यों में दीर्घकालिक रोग निगरानी के लिए सेंटिनल सर्विलांस स्थलों की स्थापना जैसी नवाचारात्मक पहलों पर प्रकाश डाला।
डॉ. गुलाटी ने वर्तमान वर्ष की प्रमुख प्राथमिकताओं की भी जानकारी दी, जिनमें कोलार जिला में रोग-मुक्त कम्पार्टमेंटलाइजेशन का पायलट कार्यान्वयन, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस नियंत्रण हेतु उन्नत रणनीतियां तथा क्षेत्रीय पशु चिकित्सकों की सहायता के लिए चैटबॉट सहित डिजिटल उपकरणों का विकास शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि निवेदी के नाद्रेस एवं चैटबॉट प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय डिजिटल प्रणालियों जैसे भारत पशुधन पोर्टल तथा भारत विस्तार पोर्टल के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

संस्थान की दूरदर्शी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए डॉ. भट्टा ने भाकृअनुप-निवेदी के प्रभावशाली योगदानों की प्रशंसा की, जिनमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से 50 से अधिक बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं की सफल प्राप्ति शामिल है। उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन रोग नियंत्रण कार्यक्रमों में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका तथा वैज्ञानिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाले स्वच्छ, हरित और जीवंत परिसर वातावरण की भी सराहना की।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान)







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