24 जून, 2026, गुवाहाटी
अट्ठाईसवीं अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी)-मशरूम कार्यशाला का संयुक्त रूप से आयोजन भाकृअनुप-मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन तथा असम कृषि विश्वविद्यालय (एएयू), जोरहाट द्वारा 23–24 जून, 2026 को असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय (एवीएफयू), खानापारा, गुवाहाटी में किया गया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, कृषि प्रसार कर्मियों तथा किसानों ने मशरूम अनुसंधान में नवीनतम प्रगति, टिकाऊ उत्पादन प्रौद्योगिकियों तथा देश में मशरूम क्षेत्र को सुदृढ़ करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
डॉ. दीपज्योति राजखोवा, माननीय कुलपति ने मुख्य अतिथि, असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट, के के रूप में उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई, जबकि डॉ. निरंजन कलिता, माननीय कुलपति, असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, खानापारा, गुवाहाटी, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. सुधाकर पांडेय, सहायक महानिदेशक (एफवीएस एंड एमपी), भाकृअनुप, नई दिल्ली, सम्मानित अतिथि रहे।
अन्य विशिष्ट अतिथियों में श्री बिपिन चंद्र, निदेशक, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डॉ. संजय चेतिया, अनुसंधान निदेशक, असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट तथा डॉ. बी.एल. अत्री, निदेशक (कार्यवाहक), भाकृअनुप-डीएमआर, सोलन, शामिल थे।
गणमान्य अतिथियों, प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों एवं किसानों का स्वागत करते हुए डॉ. संजय चेतिया ने इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कार्यशाला की मेजबानी का अवसर प्रदान करने के लिए आईसीएआर-डीएमआर, सोलन के प्रति आभार व्यक्त किया।
भाकृअनुप-डीएमआर तथा एआईसीआरपी-मशरूम कार्यक्रम की वार्षिक उपलब्धियों को प्रस्तुत करते हुए डॉ. बी.एल. अत्री ने पिछले वर्ष के दौरान किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं कृषि प्रसार संबंधी प्रयासों पर प्रकाश डाला।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. दीपज्योति राजखोवा ने भाकृअनुप-डीएमआर तथा एआईसीआरपी-मशरूम कार्यक्रम की उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना करते हुए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मशरूम उत्पादन की सतत आजीविका विकल्प के रूप में अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने मशरूम की कम भंडारण अवधि (शेल्फ लाइफ) की चुनौती से निपटने के लिए क्लस्टर आधारित उत्पादन, बाजार संबंधी जानकारी तथा मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे लाभप्रदता बढ़ाई जा सके।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. निरंजन कलिता ने राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन स्थल के रूप में असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय का चयन करने के लिए आईसीएआर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्र की शाकाहारी आबादी में कुपोषण से निपटने में मशरूम की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा मशरूम उत्पादन को पशुपालन एवं कुक्कुट पालन के साथ एकीकृत करने की वकालत की। उन्होंने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए उपयुक्त जलवायु-सहिष्णु मशरूम किस्मों के विकास के महत्व पर भी बल दिया।
मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. सुधाकर पांडेय ने भाकृअनुप-डीएमआर तथा एआईसीआरपी-मशरूम कार्यक्रम की उपलब्धियों की सराहना की तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के समर्थन के लिए व्यापक वैज्ञानिक आंकड़े तैयार करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध कच्चे माल के आधार पर मशरूम उत्पादन में विविधीकरण तथा उच्च तापमान सहन करने वाली किस्मों के विकास के लिए प्रजनन प्रयासों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने उत्तर-पूर्वी केंद्रों में स्पॉन उत्पादन को सुदृढ़ करने तथा मशरूम उत्पादकों के लिए गुणवत्तायुक्त स्पॉन की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु एक मजबूत स्पॉन प्रमाणीकरण व्यवस्था स्थापित करने का भी आह्वान किया।
क्षेत्र में मशरूम उत्पादन की विशिष्ट चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पांडेय ने उत्तर-पूर्व के एआईसीआरपी-मशरूम केंद्रों को बटन मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक गेहूं के भूसे की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रकार के मशरूमों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों की आय एवं आजीविका के अवसरों, विशेषकर सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए, बढ़ाने हेतु मूल्य संवर्धित मशरूम उत्पादों के विकास एवं लोकप्रियकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया।डी
डॉ. नृपेन चंदर, निदेशक, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, असम, ने पूरे क्षेत्र में स्पॉन की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा मशरूम उत्पादन एवं स्पॉन उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार की विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने मूल्य संवर्धन के माध्यम से मशरूम की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा रोग एवं कीट प्रबंधन के साथ-साथ उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को 20 लाख रुपये तथा स्पॉन प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
कार्यशाला के दौरान वर्ष 2025–26 के लिए एआईसीआरपी-मशरूम कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट योगदानों को सम्मानित किया गया। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय केन्द्र को अनुसंधान में सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरस्कार, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, को कृषि प्रसार गतिविधियों के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरस्कार, जबकि असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट केन्द्र को सर्वाधिक लाभार्थी कवरेज के लिए कृषि प्रसार में सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरस्कार प्रदान किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन)







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