उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केन्द्र ने एल नीनो से मुकाब तथा और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मोटे अनाजों (श्री अन्न) का किया प्रदर्शन

उत्तर दिनाजपुर कृषि विज्ञान केन्द्र ने एल नीनो से मुकाब तथा और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मोटे अनाजों (श्री अन्न) का किया प्रदर्शन

2 जुलाई, 2026, चोपड़ा, उत्तर दिनाजपुर

जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण के लिए श्री अन्न (मिलेट्स) को एक सतत समाधान के रूप में स्थापित करते हुए, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-एटारी), कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र (यूबीकेवी), उत्तर दिनाजपुर ने मिलेट मेला-सह-कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य मिलेट्स को जलवायु-सहिष्णु फसलों के रूप में बढ़ावा देना था, जो किसानों को संभावित एल नीनो से प्रेरित मौसमीय परिवर्तनशीलता के अनुरूप स्वयं को ढालने में सक्षम बनाते हैं, साथ ही मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और आय विविधीकरण के अवसर भी प्रदान करते हैं। यह कार्यक्रम नाबार्ड की परियोजना "मिलेट्स की खेती एवं उसके मूल्य संवर्धन पर क्षमता निर्माण और जागरूकता" के अंतर्गत प्रायोजित था।

मुख्य वक्तव्य वर्चुअल माध्यम से देते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-एटारी, कोलकाता, ने जलवायु-सहिष्णु कृषि, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में मिलेट्स की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की थीम के अनुरूप उन्होंने मिलेट्स को "बदलती जलवायु के लिए स्मार्ट फसलें" बताया, क्योंकि वे कम पानी और न्यूनतम बाहरी आदानों के साथ सूखे, अत्यधिक तापमान तथा सीमांत परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मिलेट्स की खेती का विस्तार एल नीनो और जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रभावों को कम करने के लिए एक रणनीतिक जलवायु अनुकूलन उपाय है, जो ग्रामीण समुदायों के लिए सतत आजीविका और उद्यमिता के अवसर भी सृजित करता है। आहार रेशा, आवश्यक खनिजों, एंटीऑक्सीडेंट्स और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर इनके पोषण प्रोफ़ाइल पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि छिपी हुई भूख (हिडन हंगर) की समस्या के समाधान के साथ-साथ सतत कृषि उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मिलेट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।

Uttar Dinajpur KVK Showcases Millets to Beat El Niño and Boost Rural Enterprise

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख ने जलवायु जोखिमों, पोषण असुरक्षा और आजीविका विविधीकरण से निपटने में मिलेट्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। नाबार्ड परियोजना के प्रधान अन्वेषक ने इस पहल की उपलब्धियों को प्रस्तुत करते हुए उन्नत मिलेट उत्पादन प्रौद्योगिकियों, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों तथा मिलेट-आधारित कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने में इसके योगदान पर प्रकाश डाला, जो सतत ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया कि मिलेट्स की खेती का विस्तार और उनके मूल्य शृंखला (वैल्यू चेन) को सुदृढ़ करने से कृषि आय में विविधता आएगी, परिवारों के पोषण स्तर में सुधार होगा तथा जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं के विरुद्ध लचीलापन विकसित होगा। उन्होंने मिलेट-आधारित उत्पादों के लिए प्रौद्योगिकी प्रसार, उद्यम विकास और बाज़ार संपर्क को तेज़ करने हेतु अनुसंधान संस्थानों, विस्तार एजेंसियों, वित्तीय संगठनों और जिला प्रशासन के बीच अधिक सशक्त समन्वय का भी आह्वान किया।

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इस कार्यक्रम में किसानों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों, ग्रामीण युवाओं, विस्तार कर्मियों तथा कृषि आदान विक्रेताओं सहित लगभग 200 हितधारकों ने भाग लिया। 1 जुलाई 2026 को आयोजित मिलेट रेसिपी प्रतियोगिता में 33 नवाचारी व्यंजनों के अंतर्गत मिलेट-आधारित 57 उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिन्होंने पौष्टिक एवं मूल्यवर्धित मिलेट उत्पादों की क्षमता को प्रदर्शित करते हुए महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता और ग्रामीण आय वृद्धि की संभावनाओं को उजागर किया। मिलेट मेले ने किसानों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों और विस्तार एजेंसियों को एक मंच पर लाकर मिलेट्स को कम लागत वाली, जलवायु-सहिष्णु फसलों के रूप में बढ़ावा दिया, जो खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं, उत्पादन जोखिमों को कम करती हैं तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से सतत आजीविका के अवसर सृजित करती हैं।

मिलेट मेले का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि मिलेट्स को "स्मार्ट फूड्स" के रूप में स्थापित किया जाए, जो एल नीनो और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, पोषण सुरक्षा बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा लचीले और उद्यम-आधारित ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने में सक्षम हैं। इस कार्यक्रम ने पुनः पुष्टि की कि जलवायु-स्मार्ट और आर्थिक रूप से सतत कृषि की आधारशिला के रूप में मिलेट्स की खेती और उनके मूल्य संवर्धन को मुख्यधारा में लाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, विस्तार तंत्र, वित्तीय संगठनों, नीति-निर्माताओं और कृषक समुदायों के बीच समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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