प्राकृतिक खेती में स्नातकोत्तर और पीएच.डी. कार्यक्रमों पर भाकृअनुप ने उद्योग एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों से परामर्श किया

प्राकृतिक खेती में स्नातकोत्तर और पीएच.डी. कार्यक्रमों पर भाकृअनुप ने उद्योग एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों से परामर्श किया

6 अक्टूबर, 2026, नई दिल्ली

भाकृअनुप के कृषि शिक्षा प्रभाग ने प्राकृतिक खेती में प्रस्तावित स्नातकोत्तर (पीजी) और पीएच.डी. कार्यक्रमों पर उद्योग विशेषज्ञों तथा शैक्षणिक हितधारकों के साथ एक परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित पीजी और पीएच.डी. कार्यक्रम भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप, वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक तथा किसानों, उद्योग और समाज से निकटता से जुड़े होने चाहिए। उन्होंने रासायनिक-मुक्त खेती की विभिन्न पद्धतियों के संबंध में वैचारिक स्पष्टता के साथ जैविक आदान, मृदा स्वास्थ्य, प्रमाणन, मूल्य श्रृंखला, विपणन, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और उद्यमिता जैसे उभरते क्षेत्रों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

ICAR Consults Industry and Academic Experts on PG and Ph.D. Programmes in Natural Farming

डॉ. सी.के. टिंबाडिया, कुलपति, गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (जीएनएफएसयू) एवं पाठ्यक्रम निर्माण समिति के अध्यक्ष, और डॉ. ए.एस. यादव, सहायक महानिदेशक (ईक्यूएआर) ने प्रस्तावित एम.एससी. और पीएच.डी. पाठ्यक्रम प्रस्तुत किए तथा बैठक में भाग लेने वाले हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किए।

इससे पहले, अपने प्रारंभिक संबोधन में डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप तथा प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उभरते अवसरों को ध्यान में रखते हुए बहुविषयक, दक्षता-आधारित और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. एस.के. शर्मा, सहायक महानिदेशक (एचआरएम), भाकृअनुप ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक का समापन उद्योग विशेषज्ञों और शैक्षणिक हितधारकों से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों एवं विचारों के साथ हुआ, जिनका उद्देश्य प्राकृतिक खेती में पीजी और पीएच.डी. कार्यक्रमों को समयबद्ध तरीके से अंतिम रूप देने और लागू करने में सहायता करना है।

×