12 सितंबर, 2026, केरल
भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत अन्य बातों के साथ-साथ केरल के कोल्लम और कोट्टायम जिलों में पर्लस्पॉट मछली (Etroplus suratensis) की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने में सहायता करता है। इसके लिए चेन्नई स्थित भाकृअनुप-केन्द्रीय खारे जल जलीय कृषि संस्थान (भाकृअनुप-सीबा) की तकनीकी सहायता से इसके विकास को संगठित तरीके से गति प्रदान की जा रही है।

इस कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, केरल के कोट्टायम जिले में मत्स्यफेड पलाइकारी फिश फार्म में भाकृअनुप-सीबा के तकनीकी परामर्श से पर्लस्पॉट मछली हैचरी स्थापित की गई है। हैचरी सुविधा का आज केरल सरकार के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह अभियांत्रिकी मंत्री एडवोकेट अब्दुल गफूर ने संचालन के लिए उद्घाटन किया। इस अवसर पर कोट्टायम से सांसद एडवोकेट फ्रांसिस जॉर्ज, वैकोम के विधायक श्री बिनिमोन, मत्स्यफेड की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह में हैचरी संचालन प्रक्रियाओं का तकनीकी अवलोकन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें ब्रूडस्टॉक प्रबंधन, प्रजनन, अंडों का ऊष्मायन, लार्वा पालन, जीवित आहार प्रबंधन और नर्सरी संचालन शामिल थे।

हैचरी की स्थापना केरल में पर्लस्पॉट मछली बीज उत्पादन को मजबूत करने और भाकृअनुप-सीबा द्वारा प्रदान की गई वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं तकनीकी परामर्श के अनुप्रयोग के माध्यम से टिकाऊ जलीय कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सुविधा से गुणवत्तापूर्ण पर्लस्पॉट मछली बीज की उपलब्धता में योगदान मिलने और राज्य में पर्लस्पॉट मछली पालन के विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय खारे जल जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)







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