कारगिल की ‘सुई’ , किसान द्वारा उत्पादित अनार किस्म को पीपीवी एवं एफआरए अधिनियम, 2001 के तहत प्राप्त हुआ संरक्षण

कारगिल की ‘सुई’ , किसान द्वारा उत्पादित अनार किस्म को पीपीवी एवं एफआरए अधिनियम, 2001 के तहत प्राप्त हुआ संरक्षण

2 अप्रैल, 2026, सोलापुर

कृषि जैव विविधता संरक्षण और किसान-आधारित नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, कारगिल के संजक गांव की किसान विकसित “सुई” अनार किस्म को आज पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 (पीपीवी एवं एफआरए अधिनियम, 2001) के तहत संरक्षण प्रदान किया गया। यह लद्दाख के शीत मरुस्थलीय क्षेत्र से अनार की किसी किस्म को मिला पहला ऐसा संरक्षण है।

Kargil’s ‘Suii’ farmer pomegranate variety granted protection under PPV&FRA Act, 2001

इस किस्म के पंजीकरण की प्रक्रिया को भाकृअनुप–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीपी), सोलापुर द्वारा सुगम बनाया गया, जो देशभर में अनार के लिए डीयूएस (विशिष्टता, एकरूपता एवं स्थिरता) परीक्षण का नोडल केंद्र है। यह कार्य कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), कारगिल, के समन्वय से संपन्न हुआ।

“सुई” एक विशिष्ट किसान किस्म है, जिसे लद्दाख के उच्च ऊंचाई वाले समशीतोष्ण क्षेत्र में विकसित किया गया है, जहां परंपरागत रूप से अनार की खेती नहीं की जाती। पीपीवी एवं एफआरए अधिनियम के तहत इसकी मान्यता न केवल गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में फसलों की अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और सुधार में स्थानीय किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करती है।

Kargil’s ‘Suii’ farmer pomegranate variety granted protection under PPV&FRA Act, 2001

इस किस्म का श्रेय कारगिल जिले के संजक गांव के प्रगतिशील किसान श्री काचो विलायत को जाता है। उनके इस अनूठे प्रयास को अब औपचारिक बौद्धिक संपदा संरक्षण के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

भाकृअनुप-एनआपसीपी के वैज्ञानिकों ने 2024–25 के दौरान डीयूएस परीक्षण हेतु कारगिल के विस्तृत क्षेत्रीय भ्रमण किए। यह पहल डॉ. आर.ए. मराठे, भाकृअनुप-एनआरसीपी, सोलापुर, के मार्गदर्शन में संचालित हुई। उनके प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया कि यह किस्म पंजीकरण के सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती है। पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण की सक्रिय भूमिका के साथ, यह पहली बार है जब कारगिल की किसी किसान विकसित अनार किस्म को ऐसा संरक्षण प्राप्त हुआ है।

Kargil’s ‘Suii’ farmer pomegranate variety granted protection under PPV&FRA Act, 2001

भाकृअनुप-एनआरसीपी, सोलापुर और केवीके, कारगिल, के अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर श्री विलायत को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की मान्यता न केवल जमीनी स्तर के नवाचार को प्रोत्साहित करती है, बल्कि किसानों को देशी आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित भी करती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को कानूनी संरक्षण और विशेष अधिकार प्रदान करने से फसल विविधता के संरक्षण एवं प्रबंधन को मजबूती मिलती है।

Kargil’s ‘Suii’ farmer pomegranate variety granted protection under PPV&FRA Act, 2001

विशेषज्ञों का मानना है कि “सुई” किस्म की सफलता से अन्य किसान भी विशिष्ट पौध किस्मों की पहचान तथा संरक्षण के लिए प्रेरित होंगे, जिससे देश में अनार की खेती में किस्मीय विविधता बढ़ेगी। यह पहल जलवायु की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा देगी और किसानों को देश के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षक के रूप में सशक्त बनाएगी।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र, सोलापुर)

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