भाकृअनुप-सीफे, कोलकाता केन्द्र ने मध्य प्रदेश के मत्स्य अधिकारियों के लिए पंगास प्रजनन तथा हैचरी प्रबंधन पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम का किया आयोजन

भाकृअनुप-सीफे, कोलकाता केन्द्र ने मध्य प्रदेश के मत्स्य अधिकारियों के लिए पंगास प्रजनन तथा हैचरी प्रबंधन पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम का किया आयोजन

9 अक्टूबर, 2026, कोलकाता

भाकृअनुप–केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता केन्द्र ने मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के 10 अधिकारियों के लिए 5 से 9 अक्टूबर, 2026 तक “पंगास का प्रेरित प्रजनन, हैचरी प्रबंधन और लार्वा पालन” विषय पर पांच दिवसीय आवश्यकता-आधारित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में पंगास (Pangasianodon hypophthalmus) हैचरियों की स्थापना और संचालन के लिए उनके तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को मजबूत करना था।

ICAR-CIFE Kolkata Centre Organizes Capacity-Building Programme on Pangas Breeding and Hatchery Management for Madhya Pradesh Fisheries Officials

यह कार्यक्रम डॉ. एन.पी. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफई, मुंबई, के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें तकनीकी व्याख्यान, व्यावहारिक प्रदर्शन और क्षेत्र भ्रमण शामिल थे, जिनमें प्रजनन जीवविज्ञान, ब्रूडस्टॉक चयन और प्रबंधन, हार्मोन का प्रयोग, प्रेरित स्पॉनिंग, अंडों का ऊष्मायन, हैचरी संचालन, लार्वा पालन, नरभक्षण प्रबंधन, पोषण संबंधी आवश्यकताएं, जल गुणवत्ता प्रबंधन, रोग निवारण और पंगास बीज उत्पादन में जैव सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को प्रेरित प्रजनन तकनीकों, हार्मोन के प्रयोग, स्ट्रिपिंग और हैचरी संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

ICAR-CIFE Kolkata Centre Organizes Capacity-Building Programme on Pangas Breeding and Hatchery Management for Madhya Pradesh Fisheries Officials

पश्चिम बंगाल के कालना, पूर्व बर्धमान और नैहाटी स्थित मत्स्य हैचरियों के क्षेत्र भ्रमण ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक प्रजनन, हैचरी प्रबंधन और लार्वा पालन पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।

प्रतिभागी अधिकारियों की प्रतिक्रिया और मूल्यांकन से संकेत मिला कि प्रशिक्षण ने पंगास प्रजनन और हैचरी प्रबंधन में उनकी तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाया। इस कार्यक्रम से मध्य प्रदेश में वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और जलीय कृषि विकास को मजबूत करने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता केन्द्र)

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