10 अक्टूबर 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद ने नव-भर्ती वैज्ञानिकों को भाकृअनुप की संगठनात्मक संरचना, प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं, अनुसंधान प्रबंधन प्रणालियों और व्यावसायिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने के लिए 15 सितंबर से 10 अक्टूबर, 2026 तक चार सप्ताह का “भाकृअनुप के सीधे भर्ती किए गए वरिष्ठ वैज्ञानिकों के लिए प्रेरण कार्यक्रम” आयोजित किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप, के ऑनलाइन संबोधन से हुआ, जिन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
प्रतिभागियों का भाकृअनुप प्रणाली में स्वागत करते हुए डॉ. मलिक ने प्रेरण कार्यक्रम में भाग लेने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक उत्कृष्टता बनाए रखने और देश के कृषि विकास में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में प्रतिदिन पांच सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें 38 आंतरिक संकाय सदस्यों और 13 अतिथि संकाय सदस्यों ने संचालित किया। सत्रों में अनुसंधान परियोजना प्रबंधन, प्रस्ताव निर्माण और प्राथमिकता निर्धारण, कृषि अनुसंधान के उभरते क्षेत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल गवर्नेंस, प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाएं, मानव संसाधन विकास, नेतृत्व, संचार कौशल, आईगॉट कर्मयोगी का परिचय और भाकृअनुप की प्रमुख नीतियां शामिल थीं। भाकृअनुप संस्थानों, स्टार्ट-अप्स, इक्रिसैट और अन्य संस्थानों के क्षेत्र भ्रमण ने कृषि अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।
प्रतिदिन सुबह आयोजित योग सत्रों, टीम-बिल्डिंग और स्ट्रेंथ फाइंडर अभ्यासों तथा व्यावहारिक गतिविधियों ने शैक्षणिक कार्यक्रम को पूरक बनाया। टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शतरंज और कैरम की खेल प्रतियोगिताओं ने आपसी सौहार्द और टीम भावना को प्रोत्साहित किया। खेल आयोजनों में प्रतिभागियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान किया।
समापन सत्र के दौरान डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने प्रतिभागियों को ऑनलाइन संबोधित किया और उनकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरण कार्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभावी उपयोग करने तथा उन्हें अपने-अपने संस्थानों में लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप–नार्म, ने पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी और “हिंदी पखवाड़ा” तथा “स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026” में भी भाग लेने के लिए उनकी सराहना की। डॉ. गोपाल लाल, संयुक्त निदेशक, भाकृअनुप–नार्म, ने आईसीएआर के नियमों और विनियमों को अच्छी तरह समझने के महत्व पर जोर दिया और प्रतिभागियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों के साथ अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर 3 पुस्तकों का विमोचन किया गया—एक संपादित पुस्तक “कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना के लिए नियामक दिशानिर्देशों में हालिया प्रगति”, एक रणनीति पत्र “भारतीय कृषि क्षेत्र में अनुसंधान प्राथमिकताएं” और एक ई-पुस्तक “वैज्ञानिक की यात्रा: प्रेरण से प्रभाव तक”।
कार्यक्रम में 19 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले छह महिला वैज्ञानिकों सहित कुल 43 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो 25 विशिष्ट विषयों को समाहित करने वाले सात व्यापक विषयों से संबंधित थे।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद)







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