भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान में ई-एग्रो एडवाइजरी पहल के तहत संतुलित उर्वरीकरण एवं जैव उर्वरकों के एकीकरण को बढ़ावा

भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान में ई-एग्रो एडवाइजरी पहल के तहत संतुलित उर्वरीकरण एवं जैव उर्वरकों के एकीकरण को बढ़ावा

28 अप्रैल, 2026, निम्पिथ

सतत कृषि पद्धतियों को मजबूत करने तथा मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रामकृष्ण आश्रम कृषि विज्ञान केन्द्र, पश्चिम बंगाल ने रिलायंस फाउंडेशन तथा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के सहयोग से आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों के सशक्तिकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम संतुलित उर्वरक उपयोग पर चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन और जैव उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता को बनाए रखने में संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण और फसल की आवश्यकता के आधार पर पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग जैव उर्वरकों के समावेश के साथ किया जाना चाहिए, ताकि पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़े, मृदा की जैविक सक्रियता में सुधार हो तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो। उन्होंने जनभागीदारी की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सामुदायिक सहभागिता से समेकित पादप पोषण प्रबंधन पद्धतियों को तेजी से अपनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने इस प्रकार की पहलों को ज्ञान आधारित गतिशील मंच बताया, जो वैज्ञानिक प्रगति और क्षेत्रीय अनुभवों का समन्वय कर किसानों को मृदा क्षरण जैसी चुनौतियों से निपटने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। 

e-Agroadvisory Initiative Promotes Balanced Fertilization and Biofertilizer Integration for Sustainable Farming at ICAR-ATARI,  Kolkata

डॉ. सी.के. मोंडल, प्रमुख, आरएकेवीके, निमपीठ ने कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षेत्र विशेष एवं मृदा परीक्षण आधारित परामर्शों के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर पोषक तत्व प्रबंधन को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरकों के एकीकृत उपयोग के महत्व पर भी चर्चा की गई, जिससे पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

कार्यक्रम में आयोजित संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र ने किसानों को अपनी समस्याओं पर चर्चा करने और समाधान प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। पश्चिम बंगाल के 45 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम ने किसानों को ज्ञान और सहयोग प्रदान करते हुए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में क्षेत्र भर के किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह सतत पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। इसने किसानों को ज्ञान से सशक्त बनाने, मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तथा भविष्य के लिए मजबूत कृषि प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु संस्थानों और हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान)

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