23 अगस्त, 2026, नेल्लोर
डॉ. वाई.एस.आर. बागवानी विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, नेल्लोर-II (पेरियावरम) के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन का आज डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार), भाकृअनुप, ने उद्घाटन किया। ₹207 लाख की वित्तीय सहायता से भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन X, हैदराबाद द्वारा निर्मित यह भवन केवीके की प्रशासनिक और प्रसार गतिविधियों को मजबूत करेगा।
कार्यक्रम में डॉ. के. धनुमजया राव, कुलपति, डॉ. वाईएसआरएचयू; डॉ. शेख एन. मीरा, निदेशक, भाकृअनुप–एटीएआरआई, जोन X, हैदराबाद; डॉ. पी.वी. सत्यनारायण, कुलपति, एएनजीआरएयू; और डॉ. जे.वी. रमना, कुलपति, एसवीवीयू सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, पदाधिकारी, केवीके के वैज्ञानिक और किसान उपस्थित थे।

किसानों को जलवायु संबंधी चुनौतियों के प्रति जागरूक करने के लिए “बागवानी फसलों पर अल नीनो का प्रभाव” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। गणमान्य व्यक्तियों ने अम्लीय नींबू, चकोतरा, मीठे संतरे, केले और पपीते की विभिन्न किस्मों के साथ-साथ अम्लीय नींबू में फूल विनियमन तकनीकों को प्रदर्शित करने वाली बागवानी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने केवीके द्वारा प्रशिक्षित उद्यमियों के साथ भी बातचीत की, जो बाजरा और सहजन आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे थे तथा आईआईआरआर द्वारा विकसित मृदा परीक्षण किट और केवीके द्वारा बढ़ावा दी जा रही प्राकृतिक खेती की पद्धतियों की समीक्षा की।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजबीर सिंह ने इस अवसर को केवीके पेरियावरम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने “एक देश, एक कृषि और एक टीम” की भावना के मार्गदर्शन में विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान के तहत समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने सिंगल-विंडो प्रौद्योगिकी वितरण, व्यापक ग्राम स्तर तक पहुंच, ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और कृषि उद्यमिता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. शेख एन. मीरा ने केवीके को आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रदर्शनों, तकनीकी परामर्श और प्रसार गतिविधियों को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नया भवन केवीके कार्यक्रमों के कुशल कार्यान्वयन और प्रबंधन में सुविधा प्रदान करेगा तथा सभा को सूचित किया कि भाकृअनुप की देशभर में 130 नए केवीके स्थापित करने की योजना है।

डॉ. पी.वी. सत्यनारायण ने विश्वविद्यालयों को किसानों से जोड़ने तथा कृषि, बागवानी, पशुपालन और संबद्ध क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सुगम बनाने में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। डॉ. जे.वी. रमना ने ग्रामीण युवाओं को कृषि और संबद्ध उद्यमों, जिसमें डेयरी फार्मिंग तथा भेड़ और बकरी पालन शामिल हैं, को टिकाऊ आजीविका के अवसरों के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. च. रूथ, निदेशक, प्रसार, डॉ. वाईएसआरएचयू ने केवीके पेरियावरम की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया और भाकृअनुप–एटीएआरआई द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता को स्वीकार किया। इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों ने “तकनीकी हस्तक्षेपों का संग्रह: डॉ. वाईएसआरएचयू–केवीके, पेरियावरम की सफलता की कहानियां” शीर्षक वाले प्रकाशन का विमोचन किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन X, हैदराबाद)







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