7 जुलाई, 2026, कोलकाता
देश के पूर्वी क्षेत्र में सतत कृषि विकास के लिए रणनीतिक साझेदारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-एनआईएनएफईटी), कोलकाता में एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (एजीआईएन), नई दिल्ली के सहयोग से भाकृअनुप कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कॉन्क्लेव–2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव में भाकृअनुप संस्थानों, कॉर्पोरेट संगठनों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना तथा सीएसआर आधारित सहयोग को सुदृढ़ करना था।
भाकृअनुप संस्थानों द्वारा विकसित नवाचारी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाली प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी-सह-पोस्टर प्रदर्शनी ने हितधारकों का व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इस प्रदर्शनी में जलवायु-सहिष्णु कृषि, सतत कृषि-खाद्य प्रणालियाँ, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, डिजिटल कृषि, मूल्य संवर्धन, कृषि मशीनीकरण, पोषण-संवेदी कृषि, आजीविका संवर्धन तथा वन हेल्थ दृष्टिकोण से संबंधित विस्तार योग्य समाधानों को प्रदर्शित किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री ज्ञानेंद्र डी. त्रिपाठी, अपर सचिव (डेयर) एवं सचिव (भाकृअनुप) ने कॉर्पोरेट संगठनों को नवाचार, पारदर्शिता और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर के साथ साझेदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. डी.बी. शाक्यवार, निदेशक, भाकृअनुप-एनआईएनएफईटी, ने सीएसआर पहलों के माध्यम से कृषि नवाचारों का विस्तार करने के लिए कॉर्पोरेट संगठनों के साथ सतत साझेदारी विकसित करने के महत्व पर बल दिया।
एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रवीण मलिक ने प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण की रणनीतियों और सीएसआर वित्तपोषण तंत्र पर विस्तार से जानकारी दी। भाकृअनुप-सीआरआईजाफ, भाकृअनुप-एटारी, भाकृअनुप-पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर तथा भाकृअनुप-निसा के निदेशकों द्वारा दिए गए तकनीकी प्रस्तुतिकरणों में जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, वन हेल्थ, जलीय कृषि, मूल्य संवर्धन, उद्यम विकास तथा लैंगिक उत्तरदायी कृषि हस्तक्षेपों में उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला गया।
कॉन्क्लेव की शोभा श्री संदीप सरकार, अपर सचिव (डेयर) एवं वित्तीय सलाहकार (भाकृअनुप) की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी। उन्होंने जलवायु परिवर्तन तथा राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं का समाधान करने के लिए कृषि प्रौद्योगिकियों के विस्तार में सीएसआर की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
एक संवादात्मक विचार-मंथन सत्र के दौरान भाकृअनुप के वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों तथा कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों के बीच प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण, स्टार्टअप समर्थन, बाज़ार संपर्क तथा संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

प्राकृतिक रेशों से विविध मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास के लिए एम/एस क्लोरोहेम्प एग्रो-टेक प्राइवेट लिमिटेड तथा एम/एस तमना क्राफ्ट्स के साथ दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। गणमान्य अतिथियों ने आईसीएआर-एनआईएनएफईटी की विभिन्न अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा पायलट सुविधाओं का भी भ्रमण किया।
कॉन्क्लेव का समापन सतत कृषि के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ हुआ। यूको बैंक, जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, ग्लॉस्टर लिमिटेड, जयश्री टेक्सटाइल्स तथा एग्रेस्टल ऑर्गेनिक लिविंग प्राइवेट लिमिटेड आईसीएआर के साथ भविष्य की सहयोगात्मक पहलों के लिए संभावित सीएसआर साझेदार के रूप में उभरकर सामने आए।
कार्यक्रम में भाकृअनुप संस्थानों, कॉर्पोरेट संगठनों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों तथा मीडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे यह नवाचार-आधारित कृषि विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता)







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