विकसित भारत के लिए पशुधन क्षेत्र महत्वपूर्ण: डीजी, आईसीएआर ने गडवासू पशुपालन मेले, लुधियाना में नवाचार और गुणवत्ता पर दिया जोर

विकसित भारत के लिए पशुधन क्षेत्र महत्वपूर्ण: डीजी, आईसीएआर ने गडवासू पशुपालन मेले, लुधियाना में नवाचार और गुणवत्ता पर दिया जोर

22 मार्च, 2026, लुधियाना

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (जीएडीवीएएसयू), लुधियाना, द्वारा आयोजित पशुपालन मेले में किसानों, पशु चिकित्सकों एवं हितधारकों को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि में पशुधन क्षेत्र की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर दिया।

Livestock Sector Central to Viksit Bharat: DG, ICAR Advocates Innovation and Quality at GADVASU Pashu Palan Mela, Ludhiana

क्षेत्र के राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगभग ₹17.5 लाख करोड़ के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए, डॉ. जाट ने कहा कि डेयरी क्षेत्र एक प्रमुख स्तंभ है, जो ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के साथ-साथ मानव पोषण तथा स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विविधीकृत और एकीकृत कृषि प्रणालियों की ओर बढ़ना आवश्यक है, जिसमें फसल एवं पशुधन गतिविधियों का समन्वय हो।

गुणवत्ता को मात्रा से अधिक महत्व देते हुए, डॉ. जाट ने उत्पादन पद्धतियों में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्पादकता और आनुवंशिक क्षमता बढ़ाने के लिए भ्रूण स्थानांतरण जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों को अपनाने की वकालत की। साथ ही, उन्होंने पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि पशु अस्पतालों को मानव स्वास्थ्य सेवाओं के समान स्तर तक उन्नत किया जाना चाहिए।

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प्रगतिशील किसानों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, जिनमें प्रतिदिन 91 किलोग्राम तक दूध उत्पादन का रिकॉर्ड शामिल है, उन्होंने नवाचार और श्रेष्ठ पद्धतियों के माध्यम से पशुधन क्षेत्र की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए, डॉ. जाट ने “एक देश, एक लक्ष्य” की अवधारणा पर बल दिया और किसानों, वैज्ञानिकों तथा संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने पंजाब के किसानों की प्रगतिशील सोच और अनुकूलन क्षमता की सराहना की।

जलवायु परिवर्तन जैसी उभरती चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने जलवायु-सहिष्णु तकनीकों के विकास को अपनाने तथा उद्यमिता-आधारित पशुधन खेती मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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संस्थागत समर्थन को दोहराते हुए, डॉ. जाट ने आश्वासन दिया कि भाकृअनुप विश्वविद्यालयों और अनुसंधान प्रणालियों को सुदृढ़ करता रहेगा, जिससे पशुधन क्षेत्र में निरंतर प्रगति और स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-1, पीएयू परिसर, लुधियाना)

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