उर्वरकों का संतुलित उपयोग – भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा पारिवारिक किसानों को किया गया जागरूक

उर्वरकों का संतुलित उपयोग – भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा पारिवारिक किसानों को किया गया जागरूक

1 मई, 2026, श्री विजय पुरम

भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने आज दक्षिण अंडमान के कालीकट, श्री विजय पुरम में “उर्वरकों का संतुलित उपयोग – एक अनिवार्यता” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य द्वीपीय परिस्थितियों में मृदा एवं जल संरक्षण तथा सतत कृषि के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को एक आवश्यक घटक के रूप में बढ़ावा देना था।

भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की एक टीम ने फसल उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने तथा पर्यावरणीय जोखिमों को न्यूनतम करने के लिए जैविक, जैव एवं अकार्बनिक पोषक स्रोतों के समन्वित उपयोग के महत्व पर जोर दिया।

ढलान वाली भूमि तथा अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती के व्यापक अनुभव के आधार पर यह बताया गया कि जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों का संतुलित उपयोग मृदा एवं जल संरक्षण उपायों को प्रभावी रूप से पूरक बनाता है। मेड़बंदी, खाई निर्माण, समोच्च खेती, मल्चिंग, हरी खाद, आवरण फसलों के उपयोग तथा मिश्रित खेती, अंतरवर्तीय खेती एवं फसल चक्र जैसी उन्नत फसल प्रणालियों के महत्व पर विशेष बल दिया गया। इन उपायों से बहाव एवं मृदा अपरदन में कमी आती है, मृदा नमी संरक्षित रहती है, पोषक तत्वों की हानि कम होती है तथा विशेष रूप से अधिक वर्षा एवं सीमित संसाधनों वाली द्वीपीय परिस्थितियों में फसल उत्पादकता बनी रहती है।

रासायनिक उर्वरकों की वर्तमान कमी तथा उनके अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों के उत्पादन और उपयोग में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वर्मी कम्पोस्टिंग, गोबर खाद निर्माण तथा खेत स्तर पर जैव उर्वरकों के उपयोग को अपनाने की दृढ़ता से वकालत की। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ एवं सतत कृषि प्रणाली की ओर यह परिवर्तन कृषि विकास एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषक समुदायों के समन्वित प्रयासों से ही संभव होगा।

Balanced Use of Fertilizers – ICAR-CIARI, Sri Vijaya Puram Sensitizes Family Farmers

एक विशेषज्ञ ने आगामी मानसून मौसम के दौरान पशुधन स्वास्थ्य से संबंधित प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की तथा पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयुक्त रोकथाम एवं उपचार उपायों की जानकारी दी।

एक अन्य विशेषज्ञ ने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखते हुए सब्जी एवं फल फसलों की उत्पादकता बनाए रखने हेतु संतुलित पोषक तत्व उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, फसलों की विभिन्न वृद्धि अवस्थाओं में पोषक आवश्यकताओं के आधार पर फसल-विशिष्ट उर्वरक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बेहतर समझ प्रदान करने हेतु प्रमुख फसलों की पोषक आवश्यकताओं एवं क्षेत्र के लिए उर्वरक प्रबंधन रणनीतियों को दर्शाने वाला एक प्रदर्शन बैनर प्रदर्शित किया गया। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के उपयुक्त विकल्पों की जानकारी देने के साथ-साथ भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा इसके कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) द्वारा संचालित जैविक खाद एवं जैव उर्वरक उत्पादन संबंधी प्रशिक्षण अवसरों की भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में लगभग 25 किसानों एवं 10 युवा अगली पीढ़ी के कृषकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। संवादात्मक सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने जैविक एवं जैव उर्वरक आधारित आदानों की उपलब्धता, तैयारी, उपयोग की विधियों तथा उपयुक्त समय के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान)

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