4 अगस्त 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप–राष्ट्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (एनआरआईआईपीएम), नई दिल्ली तथा कैबी (सीएबीए), यूके, के बीच सहयोगी कार्यक्रम “भारत में टमाटर उत्पादन के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) के संदर्भ में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों (एचएचपी) के कम-जोखिम वाले विकल्पों की पहचान तथा उनकी प्रभावशीलता का परीक्षण” की प्रारंभिक बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता, डॉ. पूनम जसरोतिया, सहायक महानिदेशक (पादप संरक्षण एवं जैव सुरक्षा), भाकृअनुप, ने की। बैठक में डॉ. रमन थानागवेलु, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम, के साथ-साथ संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. रेखा बलोदी और डॉ. मनोज चौधरी उपस्थित थे। कैबी-इंडिया का प्रतिनिधित्व डॉ. विनोद पंडित, निदेशक (दक्षिण एशिया), कैबी; डॉ. रुचि गुप्ता, तकनीकी कीटनाशक विशेषज्ञ; तथा डॉ. मंजू ठाकुर, फसल स्वास्थ्य सलाहकार ने किया।

यह बैठक भाकृअनुप तथा कैबी के बीच टमाटर उत्पादन में सतत कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औपचारिक सहयोग की शुरुआत का प्रतीक रही। इस सहयोग के अंतर्गत एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) के ढांचे में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के सुरक्षित विकल्पों की पहचान, मूल्यांकन और प्रोत्साहन पर कार्य किया जाएगा, जिसके लिए भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम “टमाटर उत्पादन में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में एकीकृत कीट प्रबंधन रणनीतियों” पर परीक्षण संचालित करेगा।
बैठक के दौरान विचार-विमर्श किया गया कि टमाटर में कीट प्रबंधन के लिए अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों का उपयोग स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत जोखिमपूर्ण है, क्योंकि टमाटर का सेवन कच्चे रूप में भी किया जाता है। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. पूनम जसरोतिया ने कहा कि वर्तमान में व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के प्रभावी, कम-जोखिम वाले तथा लेबल-अनुमोदित रासायनिक विकल्पों की पहचान और सत्यापन की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन कीटनाशकों की खतरनाक प्रकृति तथा सुरक्षित विकल्पों की उपलब्धता के बारे में सीमित जागरूकता के कारण इनका उपयोग जारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित विकल्पों पर वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करने से सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और किसानों द्वारा इनके अपनाने को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. रमन थानागवेलु ने कहा कि एकीकृत कीट प्रबंधन, गैर-रासायनिक उपायों और आवश्यकता-आधारित सुरक्षित रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को समाहित करके टमाटर में कीट प्रबंधन का एक सतत दृष्टिकोण प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि विशिष्ट कीट परिस्थितियों और प्रचलित कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप विकसित आईपीएम मॉड्यूल अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए प्रभावी कीट प्रबंधन सुनिश्चित कर सकते हैं। डॉ. मनोज चौधरी और डॉ. रेखा बलोदी ने भी टमाटर के लिए भाकृअनुप-एनआरआईआईपीएम द्वारा विकसित आईपीएम मॉड्यूल के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. विनोद पंडित ने सतत फसल उत्पादन के लिए कैबी की वैश्विक पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की और इस बात पर जोर दिया कि यह सहयोग टमाटर के लिए सुरक्षित कीट प्रबंधन रणनीतियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा, जिसकी वैश्विक प्रासंगिकता भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के परिणाम सब्जी उत्पादन प्रणालियों में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं।
परियोजना के तकनीकी घटकों और कार्यान्वयन रणनीति को प्रस्तुत किया गया तथा सहभागी वैज्ञानिकों ने परियोजना के विभिन्न मॉड्यूल, कार्यप्रणालियों, क्षेत्रीय सत्यापन, हितधारकों की भागीदारी तथा कार्यान्वयन रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की, ताकि परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन और उद्देश्यों की सफल प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके। बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों, समय-सीमा और सहयोगात्मक जिम्मेदारियों पर व्यापक चर्चा तथा अध्यक्ष के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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