रबी दालहन उत्पादन हेतु वैज्ञानिक बैठक - सह - क्षेत्र दिवस का किया गया आयोजन

रबी दालहन उत्पादन हेतु वैज्ञानिक बैठक - सह - क्षेत्र दिवस का किया गया आयोजन

9 फरवरी, 2026, कानपुर

रबी मौसम की दालें जैसे चना, मसूर तथा फील्ड मटर देश में दाल उत्पादन की रीढ़ हैं, जो पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, मिट्टी की स्वास्थ्य सुधारने और भारत की अलग-अलग कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में किसानों की रोजी-रोटी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। 2030 और 2047 के लिए तय बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य को पाने के लिए मिलकर रिसर्च करने की कोशिशें, मजबूत संस्थानिक जुड़ाव तथा हितधारक के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

इसी सिलसिले में, भाकृअनुप–राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर, में ‘रबी दाल वैज्ञानिक बैठक -सह-फील्ड डे’ कामयाबी से आयोजित किया गया।

Rabi Pulse Scientists’ Meet-cum-Field Day Organized

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता निदेशक, भाकृअनुप–आईआईपीआर, ने की, तथा इसमें देश भर से 30 से ज़्यादा वैज्ञानिक ने हिस्सा लिया, जो भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी), ट्रॉम्बे, समेत अलग-अलग राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर, प्रतिभागियों ने आईआईपीआर अनुसंधान फार्म में रबी दाल अनुसंधान क्षेत्र का दौरा किया, जहाँ उन्होंने अपने-अपने दाल सुधार प्रोग्राम्स के लिए सही जर्मप्लाज्म और ब्रीडिंग सामग्री को अवलोकन किया और इसे चुना। क्षेत्र संवाद से विचारों के आदान प्रदान में मदद मिली तथा किस्मों के विकास में तेजी लाने और उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से सहयोगी अनुसंधान के प्रयास को मज़बूती मिली।

Rabi Pulse Scientists’ Meet-cum-Field Day Organized

समापन सत्र की अध्यक्षता, डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने की, जो पौधा किस्म संरक्षण एवं किसान अधिकार प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए), नई दिल्ली, के चेयरपर्सन और पूर्व सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) हैं। डॉ. महापात्रा ने हिस्सा लेने वाले साइंटिस्ट्स से बातचीत की और दाल रिसर्च को आगे बढ़ाने में सुरक्षा की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने दालों में भविष्य के उत्पादन तथा टिकाऊपन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अनुसंधान रणनीति तथा सहयोगात्मक पहलों को और मजबूत करने के लिए कीमती सुझाव दिया।

बैठक-सह-क्षेत्र दिवस ने वैज्ञानिक संवाद, जर्मप्लाज्म आदान-प्रदान और रणनीतिक योजना निर्माण के लिए एक गतिशील मंच प्रदान किया, जिससे भाकृअनुप–राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान की प्रतिबद्धता और सुदृढ़ हुई।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर)

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