17 मार्च, 2026, पंजाब
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली. के सहयोगी बाह्य अनुसंधान केन्द्र द्वारा आज एक किसान मेला आयोजित किया गया। यह मेला पंजाब के राखड़ा में यंग फार्मर्स एसोसिएशन पंजाब (वाईएफएपी) परिसर में आयोजित हुआ, जिसने भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, के कृषि वैज्ञानिकों और पंजाब के किसानों के बीच ज्ञान आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों तक उन्नत तकनीकों—जैसे उन्नत बीज, फसल उत्पादन और फसल संरक्षण तकनीकों—को पहुंचाना है, ताकि सतत विकास तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए फसल किस्मों और कृषि प्रौद्योगिकी में नवीनतम उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत के कृषि विकास में पंजाब के किसानों की “उत्कृष्ट भूमिका” की सराहना की। साथ ही बदलते जलवायु पैटर्न और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए उन्होंने फसल विविधीकरण और जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को “समय की आवश्यकता” बताया।
उन्होंने मानव, पशु एवं मृदा स्वास्थ्य की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए कृषि रसायनों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। इसके अलावा, बेहतर उत्पादन और लाभ के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के महत्व को रेखांकित किया।
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण वाईएफएपी, राखड़ा में नए बीज भंडार का उद्घाटन रहा, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता को बढ़ाना है। इस अवसर पर डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

किसानों को भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा विकसित बासमती और गैर-बासमती धान तथा गेहूं की नई किस्मों के बारे में जानकारी दी गई, जो कम समय में पकने वाली, अधिक उत्पादन देने वाली और कम पानी की खपत करने वाली हैं। यह मेला भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली, की “लैब-टू-लैंड” प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके माध्यम से पंजाब के किसानों तक उन्नत तकनीकों को पहुंचाया जा रहा है।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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