पशुपालन आयुक्त ने भाकृअनुप-निवेदी, बेंगलुरु का दौरा किया; रोग नियंत्रण एवं वैश्विक वैज्ञानिक सहभागिता को मजबूत करने पर दिया जोर

पशुपालन आयुक्त ने भाकृअनुप-निवेदी, बेंगलुरु का दौरा किया; रोग नियंत्रण एवं वैश्विक वैज्ञानिक सहभागिता को मजबूत करने पर दिया जोर

1 अप्रैल, 2026, बेंगलुरु

डॉ. नवीन बी.एम., पशुपालन आयुक्त (एएचसी), पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार ने भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान (भाकृअनुप-निवेदी), बेंगलुरु, का दौरा किया।

अपने दौरे के दौरान, डॉ. नवीन बी.एम. ने देश में पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन और रोग निगरानी के क्षेत्र में भाकृअनुप-निवेदी के महत्वपूर्ण योगदानों की सराहना की। उन्होंने संस्थान की वैश्विक वैज्ञानिक पहचान को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही राष्ट्रीय पशुधन कार्यक्रमों को प्रभावी सहयोग प्रदान करते रहने की बात कही। उन्होंने डीएएचडी की विभिन्न पहलों में संस्थान के तकनीकी योगदान को भी स्वीकार किया और ‘पैंडेमिक फंड’ जैसे तंत्रों के माध्यम से विभाग के निरंतर सहयोग को पुनः आश्वस्त किया।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, डॉ. बलदेव आर. गुलाटी, निदेशक, भाकृअनुप-निवेदी, ने पशु रोग महामारी विज्ञान, रोग पूर्वानुमान तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए निर्णय-सहायता प्रणालियों में संस्थान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाकृअनुप-निवेदी तथा डीएएचडी के बीच मजबूत एवं सतत सहयोग की भी सराहना की।

Animal Husbandry Commissioner Visits ICAR-NIVEDI, Emphasizes Strengthened Disease Control and Global Scientific Engagement

चर्चा के दौरान, डॉ. गुलाटी ने प्रमुख नीतिगत पहलुओं पर जोर दिया, जिसमें स्थानिक (एंडेमिक) रोगों के लिए क्यूलिंग (संक्रमित पशुओं के निष्कासन) रणनीतियों की पुनः समीक्षा तथा ब्रुसेलोसिस नियंत्रण को मजबूत करने के लिए वर्तमान एकल टीकाकरण के स्थान पर वर्ष में तीन बार टीकाकरण अभियान चलाने की आवश्यकता शामिल है।

पशुपालन आयुक्त के साथ आई संयुक्त आयुक्त डॉ. अरुणा शर्मा ने रोग पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में भाकृअनुप-निवेदी की प्रगति की सराहना की और सक्रिय (प्रोएक्टिव) रोग प्रबंधन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

यह दौरा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में भाकृअनुप-निवेदी के रणनीतिक महत्व को और मजबूत करता है तथा भारत में पशुधन रोग नियंत्रण ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में इसकी अहम भूमिका को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु)

×