पश्चिम बंगाल में पीपीवी एवं एफआरए पर जागरूकता-सह-प्रदर्शनी कार्यक्रम से किसानों के अधिकार तथा जैव विविधता संरक्षण को मिला बल

पश्चिम बंगाल में पीपीवी एवं एफआरए पर जागरूकता-सह-प्रदर्शनी कार्यक्रम से किसानों के अधिकार तथा जैव विविधता संरक्षण को मिला बल

17 मार्च 2026, कल्याणी

किसानों को कानूनी जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाने और कृषि जैव विविधता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, पौध किस्मों और कृषकों के अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 (पीपीवी एवं एफआरए) पर एक जागरूकता-सह-प्रदर्शनी कार्यक्रम का सफल आयोजन भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केंद्र, नदिया (अतिरिक्त), पूर्वी क्षेत्रीय स्टेशन (इआरएस), भाकृअनुप–राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, कल्याणी में किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और हितधारकों को पीपीवी एवं एफआरए, 2001 के प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाना, स्वदेशी किस्मों के पंजीकरण को बढ़ावा देना तथा कृषि जैव विविधता के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना था।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए, डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता, ने कहा कि पौध किस्मों और कृषकों के अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 किसानों के अधिकारों की रक्षा, जैव-डाकू (बायोपायरेसी) को रोकने और पादप प्रजनन में नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि स्वदेशी परंपरागत किस्में अमूल्य आनुवंशिक संसाधन हैं, जो दीर्घकालिक खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हैं।

कार्यक्रम में किसानों को पारंपरिक फसल किस्मों की सुरक्षा हेतु कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, अधिनियम के उद्देश्यों और किसानों की किस्मों के पंजीकरण की प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों के बीच व्यापक प्रसार हेतु बंगाली और अंग्रेजी में तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

Awareness-cum-Exhibition Programme on PPV&FRA Strengthens Farmers’ Rights and Biodiversity Conservation in West Bengal

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रदर्शनी रही, जिसमें कृषि एवं बागवानी फसलों की 200 से अधिक स्वदेशी किस्मों—जैसे अनाज, दलहन, तिलहन और सब्जियों—का प्रदर्शन किया गया। राज्य संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी), निजी उद्यमों और प्रगतिशील किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉल ज्ञान के आदान-प्रदान और पौध किस्म संरक्षण तथा जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सशक्त मंच बने।

बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय और आत्मा, नदिया के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में पश्चिम बंगाल में किसानों की किस्मों के पंजीकरण की वर्तमान स्थिति और राष्ट्रीय मान्यता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही, विशेषकर बागवानी फसलों में पंजीकरण के लाभ, प्रक्रियाएं और उभरते अवसरों पर प्रकाश डाला गया।

प्रतिभागियों की सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और समूह चर्चा जैसी इंटरैक्टिव क्षमता-विकास गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे अनुभवात्मक सीख को बढ़ावा मिला और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण अवधारणाएं सुदृढ़ हुईं।

कार्यक्रम का समापन समापन सत्र एवं पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनी स्टॉल के विजेताओं को सम्मानित किया गया। पारंपरिक फसल विविधता के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए 25 किसानों को स्वदेशी किस्म संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 200 हितधारकों—जिनमें किसान, प्रसार कर्मी, छात्र, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा नदिया जिले के नौ प्रखंडों से आए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किसान शामिल थे—ने भाग लिया।

अपने सहभागी और बहु-हितधारक दृष्टिकोण के माध्यम से इस कार्यक्रम ने पीपीवी एवं एफआरए, 2001 के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ किया तथा किसानों को स्वदेशी फसल किस्मों की पहचान, संरक्षण और पंजीकरण के लिए प्रेरित किया, जिससे जैव विविधता संरक्षण और किसानों के अधिकारों को मजबूती मिली तथा सतत कृषि विकास को बढ़ावा मिला।

(स्रोत: नदिया, भाकृअनुप–राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्याणी)

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