पोल्ट्री कॉक्सीडियोसिस: रोग की पहचान और उत्पादन में होने वाली हानि से बचाव

पोल्ट्री कॉक्सीडियोसिस: रोग की पहचान और उत्पादन में होने वाली हानि से बचाव

पोल्ट्री कॉक्सीडियोसिस एक आंत संबंधी रोग है, जो Eimeria वंश से संबंधित अंतःकोशिकीय प्रोटोजोआ परजीवियों के कारण होता है। विभिन्न Eimeria प्रजातियां अपनी रोगजनकता में भिन्न होती हैं और आंतों में विभिन्न प्रकार तथा अलग-अलग स्तर के घाव पैदा कर सकती हैं। प्राकृतिक परिस्थितियों में किसी एक प्रजाति से संक्रमण होना असामान्य है, जबकि दो या दो से अधिक प्रजातियों से होने वाला मिश्रित संक्रमण अक्सर देखा जाता है।

कॉक्सीडियोसिस आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण आंत्र रोग है, क्योंकि इससे उत्पादन में महत्वपूर्ण हानि, उच्च रुग्णता, रक्तस्रावी आंत्रशोथ और मृत्यु हो सकती है। इस रोग की प्रमुख विशेषताओं में अवसाद, कमजोरी, भूख में कमी, पंखों का फूला हुआ होना और विशेष रूप से खूनी दस्त शामिल हैं।

Poultry Coccidiosis: Recognising the Disease and Preventing Production Losses

झुंड के स्तर पर संक्रमण के लगभग 72 घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लग सकते हैं। पक्षी कमजोर हो सकते हैं, खाना बंद कर सकते हैं और एक-दूसरे से सटकर बैठ सकते हैं, जबकि लगभग 96 घंटे में बीट में खून दिखाई दे सकता है। संक्रमण के चौथे से छठे दिन के बीच मृत्यु दर सबसे अधिक होने की सूचना है।

निदान नैदानिक लक्षणों और शव-परीक्षण के साथ-साथ Eimeria प्रजातियों की पहचान के लिए मल के नमूनों की जांच के आधार पर किया जाता है। आंतों के घावों का स्थान और प्रकृति भी संबंधित प्रजाति का संकेत दे सकती है।

प्रबंधन और रोकथाम के उपायों में अच्छी फार्म स्वच्छता और सैनिटेशन बनाए रखना, पोल्ट्री घरों और बिछावन को सूखा रखना, नियमित रूप से बीट हटाना तथा संक्रमण को कम करने के लिए उचित उपाय करना शामिल है। दूसरे भाग में कॉक्सीडियोरोधी दवाओं से उपचार की भी जानकारी दी गई है और दवा प्रतिरोध के विकास को कम करने के लिए दवाओं को बदल-बदलकर इस्तेमाल करने जैसी प्रथाओं की सिफारिश की गई है।

(स्रोत: भाकृअनुप आरसी एनईएच, उमियम, मेघालय)

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