10 फरवरी, 2026, बसर
पीएम श्री विद्यालय की खास पहल के तहत, जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), कोम्बो, वेस्ट सियांग जिला के प्राध्यापकगण के साथ बहत्तर विद्यार्थियों ने भाकृअनुप (आरसी) पूर्वोत्तर क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश केन्द्र, बसर, के एक बड़े शैक्षणिक प्रदर्शन दोरे में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकी, टिकाऊ उत्पादन व्यवस्था एवं कृषि विज्ञान में उभरते करियर के मौकों के बारे में बताने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
प्रोग्राम की शुरुआत डॉ. रघुवीर सिंह, प्रभारी प्रमुख, केन्द्र, के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने केन्द्र के आदेश, तणनीतिक अनुसंधान क्षेत्र तथा बड़े तकनीकी हस्तक्षेप के बारे में बताया। उन्होंने मशरूम उत्पादन तकनीकी के बारे में भी बताया, और पहाड़ी खेती के सिस्टम के तहत पोषण सुरक्षा, रोजी-रोटी में विविधीकरण और आय बढ़ाने में उनकी अहमियत पर ज़ोर दिया।

इलाके की खास खेती की फसलों का एक अवलोकन पेश किया गया, साथ ही सेंटर में लागू किए जा रहे समेकित कृषि व्यवस्था (आईएफएस) प्रतिमान के बारे में विस्तार में बताया गया। प्रस्तुतीकरण में स्रोत को कम करने, रिस्क को कम करने और खेती की पूरी टिकाऊपन को बढ़ाने में आईएफएस दृष्टिकोण की भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
मृदा विज्ञान पर सत्र में इलाके की मिट्टी पर आधारित फसल की सटीकता और संभावित फसल व्यवस्था पर केंद्रित किया गया। मिट्टी की हेल्थ को बेहतर बनाने और टिकाऊ खेती की उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए वर्मीकम्पोस्टिंग और जैविक पोषक तत्व के पुनर्चक्रण के महत्व पर ज़ोर दिया गया।
फसल विकल्प आधारित पद्धति, फसल विविधीकरण रणनीति एवं पौधों के जेनेटिक स्रोत के संरक्षण पर भी रूप-रेखा साझा की गईं। चर्चा में जलवायु-अनुकूल बनाने, जेनेटिक रिसोर्स को संरक्षित करने और अनुकूलित फसल सुधार कार्यक्रम को सहायता करने में उनके महत्व पर ज़ोर दिया गया।
पशुधन एवं संबद्ध विज्ञान पर आधारित सत्र में वैज्ञानिक पशषु पालन गतिविधि और प्रजनन का प्रबंधन को कवर किया गया, जिसमें समेकित एवं मिश्रित खेती व्यवस्था के अंदर पशुधन कंपोनेंट की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया। इसके अलावा, स्टूडेंट्स को बागवानी और एग्जॉटिक फलों की फसलों से अवगत कराया गया, जिसमें उनके व्यावसायिक क्षमता, पोषण क्षमता एवं पहाड़ी खेती में विविधीकरण की गुंजाइश पर जोर किया गया।

प्रदर्शन कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर, विद्यार्थियों ने मशरूम संग्रहालय, क्रॉप कैफेटेरिया, विशिष्ट फल इकाई, डेयरी और पशु विज्ञान इकाई, एकीकृत कृषि व्यवस्था इकाई, मौसम वेधशाला, कृषि वानिकी ब्लॉक तथा संभावित फसल ब्लॉक समेत कई अनुसंधान एवं प्रदर्शन इकाई का दौरा किया। व्यवहारिक परिचय से स्टूडेंट्स को उच्च स्तरीय कृषि अनुसंधान, तकनीकी प्रदर्शन तथा खेत आधारित प्रयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिली।
शैक्षणिक प्रदर्शन भ्रमण बहुत उपयोगी साबित हुई, जिससे स्टूडेंट्स की आधुनिक, अनुसंधान प्रेरित और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की समझ काफी बढ़ी, साथ ही खाद्य, पोषण और आजीविका सुरक्षा पक्का करने में कृषि अनुसंधान एवं आविष्कार की अहम भूमिका के बारे में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता को बढ़ावा मिला।
(स्रोत: पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए भाकृअनुप के अनुसंधान परिसर, अरुणाचल प्रदेश सेंटर, बसर)







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