20 जून, 2026
प्रधानमंत्री ने आज पश्चिम बंगाल के हुगली से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी की, जिसके तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 9.44 करोड़ से अधिक किसानों, जिनमें 2.18 करोड़ महिला किसान शामिल हैं, को ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। वर्ष 2019 में शुरू होने के बाद से, इस योजना के अंतर्गत ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे पीएम-किसान विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी पहलों में से एक बन गई है। इस अवसर को देशभर में पीएम-किसान उत्सव दिवस के रूप में मनाया गया।
इस अवसर को चिह्नित करने के लिए, प्रधानमंत्री के संबोधन और निधि जारी करने के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देशभर के आईसीएआर संस्थानों, अनुसंधान केन्द्रों और कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) में आयोजित किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, विस्तार कार्मिकों, किसानों, कृषक महिलाओं, विद्यार्थियों तथा अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और किसान संपर्क तथा कृषि विकास के प्रति आईसीएआर की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की।
भाकृअनुपर–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून
भाकृअनुपर–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने आज भारत के प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में किसानों के लिए एक जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। डॉ. बी.पी. भट्ट, निदेशक के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में 112 किसानों के साथ-साथ वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन और देशव्यापी पीएम-किसान निधि जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण में भाग लिया। कार्यक्रम में किसानों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सतत कृषि को बढ़ावा देने में पीएम-किसान के महत्व को रेखांकित किया गया। उत्तराखंड सरकार की हर्बल सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्री भुवन विक्रम डोभाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने किसानों की आजीविका में सुधार लाने में पीएम-किसान तथा आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर बल दिया।

संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए गए, जिनमें मृदा स्वास्थ्य, कुशल पोषक तत्व प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। एक ड्रोन प्रदर्शन के माध्यम से सटीक छिड़काव, फसल निगरानी और कुशल कृषि प्रबंधन के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में मृदा एवं जल संरक्षण, जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक खेती और सरकारी सहायता योजनाओं पर एक संवादात्मक किसान–वैज्ञानिक परिचर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को सतत कृषि विकास के लिए वैज्ञानिक संसाधन-प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु
आईसीएआर–राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु ने आज अपने हेब्बल परिसर में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आईसीएआर-एनबीएआईआर के निदेशक डॉ. टी. वेंकटेसन की उपस्थिति में भाग लिया।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने में पीएम-किसान के महत्व को रेखांकित किया गया तथा पर्यावरण-अनुकूल कीट प्रबंधन, जैविक नियंत्रण प्रौद्योगिकियों, जैविक खेती और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना (डीएपीएससी एवं एसटी) के तहत कर्नाटक के दावणगेरे और चित्रदुर्ग जिलों के किसानों को जैव-नियंत्रण इनपुट वितरित किए गए, जिससे पर्यावरणीय रूप से सतत फसल संरक्षण को बढ़ावा मिला और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिली।
प्रधानमंत्री के संबोधन के लाइव प्रसारण तथा पीएम-किसान की 23वीं किस्त के जारी होने का सीधा प्रसारण कुल 400 प्रतिभागियों, जिनमें 150 किसान, छात्र और शोधकर्ता शामिल थे, ने देखा।
भाकृअनुप–भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
भाकृअनुप–भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में पीएम-किसान उत्सव दिवस मनाया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए भाकृअनुप-आईआईएमआर की निदेशक डॉ. सी. तारा सत्यवती ने किसानों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करने में पीएम-किसान के महत्व पर प्रकाश डाला और उन्हें उन्नत प्रौद्योगिकियों, गुणवत्तापूर्ण बीजों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा जलवायु-सहिष्णु खेती में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सतत कृषि, पोषण सुरक्षा और कृषि आय में वृद्धि को बढ़ावा देने में श्रीअन्न की खेती की भूमिका पर भी बल दिया।
इस अवसर पर, भाकृअनुप-आईआईएमआर ने तेलंगाना के संगारेड्डी स्थित द्रविड़ा फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (डीएफपीसीएल) के साथ श्रीअन्न आधारित मूल्य श्रृंखलाओं, बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास और बाजार संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया, जिससे किसानों के लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में श्रीअन्न की खेती, मूल्य संवर्धन और कृषि व्यवसाय के अवसरों पर किसानों और विशेषज्ञों के बीच संवाद भी आयोजित किया गया।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भाकृअनुप-आईआईएमआर द्वारा प्रोत्साहित एफपीओ से जुड़े किसानों, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के सदस्यों, महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन तथा पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने के सीधे प्रसारण में भाग लिया और सतत कृषि, किसान कल्याण तथा सुदृढ़ ग्रामीण आजीविका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की।
भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम ने कृषि विज्ञान केन्द्र दक्षिण अंडमान, कृषि विज्ञान केंद्र उत्तर एवं मध्य अंडमान, कृषि विज्ञान केंद्र निकोबार तथा आईसीएआर-सीआईएआरआई क्षेत्रीय केन्द्र, मिनिकॉय (लक्षद्वीप) के साथ मिलकर आज खेत बचाओ अभियान 2026 के साथ समन्वय में पीएम-किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया।
प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री द्वारा पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के सीधे प्रसारण में भाग लिया और उन्हें संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरक, वैज्ञानिक धान की खेती, एकीकृत कीट प्रबंधन तथा जैविक और प्राकृतिक खेती सहित सतत कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में पीएम-किसान और खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला गया तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और जलवायु-सहिष्णु कृषि पर बल दिया गया। संवादात्मक सत्रों के माध्यम से किसानों को कृषि संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करने और विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम आईसीएआर-सीआईएआरआई के निदेशक (कार्यवाहक) डॉ. जय सुंदर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से कुल 264 किसानों और हितधारकों तथा मिनिकॉय, लक्षद्वीप से 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र, उमियाम
भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र, उमियाम ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), री भोई तथा मेघालय सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने और कृषि विकास को बढ़ावा देने में पीएम-किसान योजना के महत्व पर प्रकाश डाला गया। गणमान्य व्यक्तियों ने कृषि उपज के प्रत्यक्ष विपणन, किसान-केंद्रित सरकारी योजनाओं के प्रति अधिक जागरूकता, पीएमएफबीवाई, पीएम-कुसुम और पर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसी प्रमुख योजनाओं के अभिसरण तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत कृषि विकास के लिए किसानों, राज्य विभागों और आईसीएआर संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग के महत्व पर बल दिया।
इस कार्यक्रम में मेघालय सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री टिमोथी डी. शिरा, आईसीएआर आरसी एनईएच के निदेशक डॉ. जी. कादिरवेल, भाकृअनुप-अटारी जोन VII के निदेशक डॉ. ए.के. मोहंती तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में 172 किसानों के साथ-साथ राज्य सरकार के अधिकारियों और भाकृअनुप के कर्मचारियों ने भाग लिया।
भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने अपने कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) के साथ मिलकर आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे वेबकास्ट का आयोजन किया।
कार्यक्रम में छोटे और सीमांत किसानों के समर्थन में पीएम-किसान के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा इसमें पीएम धन-धान्य कृषि योजना, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन, खरीफ फसल योजना, प्राकृतिक खेती और खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरीकरण पर जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।

प्रतिभागियों को फसल और पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकियों, जैव उर्वरकों तथा कृषि यंत्रीकरण के बारे में भी जागरूक किया गया। एक संवादात्मक किसान–वैज्ञानिक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को शुष्कभूमि कृषि और सतत कृषि पद्धतियों पर चर्चा करने का अवसर मिला, जिससे उत्पादकता वृद्धि और किसान कल्याण के लिए वैज्ञानिक एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि के महत्व को और सुदृढ़ किया गया।
कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों, केवीके कर्मचारियों तथा आईएआरआई मेगा यूनिवर्सिटी हैदराबाद हब के विद्यार्थियों सहित कुल 263 प्रतिभागियों ने भाग लिया और प्रधानमंत्री के संबोधन का अवलोकन किया।
भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के अवलोकन तथा किसान संगोष्ठी का आयोजन किया। प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के अंतर्गत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को ₹18,880 करोड़ की राशि जारी किए जाने के सीधे प्रसारण को देखा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया उपस्थित रहे। गुरुग्राम के शिकोहपुर स्थित आईसीएआर-आईएआरआई कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने भी भाग लिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डीएआरई के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि को बढ़ावा देने में खेत बचाओ अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला तथा वैश्विक कृषि रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए आईसीएआर-आईएआरआई को बधाई दी।
कार्यक्रम में भाकृअनुप-आईएआरआई के डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई सहित संयुक्त निदेशक, परियोजना निदेशक, वैज्ञानिक, किसान, विद्यार्थी, अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत कृषि प्रणाली, श्रीअन्न उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ, उन्नत सब्जी उत्पादन, बीज उत्पादन, खरीफ फसलों में एकीकृत कीट प्रबंधन, रोग प्रबंधन, फल उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से किसानों को उत्पादकता वृद्धि और सतत आजीविका के लिए आधुनिक वैज्ञानिक एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता
भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने आज खेत बचाओ अभियान के साथ समन्वय में पीएम-किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने के सीधे प्रसारण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री श्री शांतनु ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और पीएम-किसान, पीएमएमएसवाई, पीएमएफबीवाई, आरडब्ल्यूबीसीआईएस, डिजिटल कृषि मिशन (एग्रीस्टैक), राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तथा पीएम धन-धान्य कृषि योजना सहित सरकार की प्रमुख पहलों की किसानों और मत्स्य पालकों की आजीविका को सुदृढ़ करने में भूमिका पर प्रकाश डाला।

सीधे प्रसारण से पूर्व, "स्वस्थ मृदा, स्वस्थ फसल, समृद्ध किसान" विषय पर खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक खेती पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यक्रम में जलवायु-सहिष्णु कृषि, एकीकृत कृषि प्रणालियों, जल के कुशल उपयोग तथा वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन को भी बढ़ावा दिया गया।
पश्चिम बंगाल और बिहार के कुल 286 किसानों, मत्स्य पालकों तथा हितधारकों ने कार्यक्रम में भाग लिया, विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और सुदृढ़ ग्रामीण आजीविका के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, सतत कृषि तथा संस्थागत सहयोग के महत्व की पुनर्पुष्टि की।
भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर
भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने अपने कृषि विज्ञान केन्द्र (उत्तर 24 परगना अतिरिक्त) के साथ मिलकर आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में पीएम-किसान उत्सव 2026 का आयोजन किया। 200 से अधिक किसानों और कृषक महिलाओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन के सीधे प्रसारण को देखा, जबकि इस कार्यक्रम में किसानों, कृषक महिलाओं, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों, राज्य सरकार के अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों सहित 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार के शिक्षा तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार मुख्य अतिथि के रूप में तथा बैरकपुर के विधायक श्री कौस्तव बागची विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. गौरांग कर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआईजैफ, ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और किसानों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए संस्थान की पहलों पर प्रकाश डाला, साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के समर्थन में पीएम-किसान के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान कृषक महिलाओं और प्रगतिशील किसानों को प्रमाण-पत्र, कृषि आदान तथा छोटे कृषि उपकरण वितरित किए गए और प्रतिभागियों को सतत आजीविका संवर्धन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों तथा महिला-केंद्रित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
भाकृअनुप–केन्द्रीय मीठे जल जीवपालन संस्थान, भुवनेश्वर
भाकृअनुप–केन्द्रीय मीठे जल जीवपालन संस्थान, भुवनेश्वर ने कृषि विज्ञान केंद्र, खुर्दा के सहयोग से आज पीएम-किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया, जिसमें लगभग 250 किसानों, कृषक महिलाओं और हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ आईसीएआर-सीआईएफए के प्रभारी निदेशक डॉ. एस. एस. गिरी के संबोधन से हुआ, जिन्होंने कृषि और जलीय कृषि आधारित आजीविकाओं को सुदृढ़ करने के लिए किसान-केंद्रित योजनाओं और संस्थागत सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों का संचालन ओडिशा सरकार के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के सहायक कृषि अधिकारी श्री गौतम परिड़ा, सेवानिवृत्त बीज प्रमाणीकरण अधिकारी डॉ. नकुल मलिक तथा डॉ. एस. एन. सेठी द्वारा किया गया, जिसमें सरकारी योजनाओं, जैव उर्वरकों, सतत कृषि पद्धतियों और मृदा स्वास्थ्य तथा सतत फसल प्रबंधन को बढ़ावा देने में खेत बचाओ अभियान के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में एक किसान संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसके बाद प्रधानमंत्री के संबोधन और पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने का सीधा प्रसारण किया गया।
भाकृअनुप–काजू अनुसंधान निदेशालय, पुत्तूर
भाकृअनुप–काजू अनुसंधान निदेशालय, पुत्तूर, कर्नाटक ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया, जिसमें कर्नाटक के कोक्काड़ा, उप्पिनंगड़ी, कड़बा और सुल्लिया तालुकों से 100 किसानों के साथ-साथ भाकृअनुप-डीसीआर के कर्मचारियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम को कृषि विभाग के सहयोग से तथा कर्नाटक सरकार की आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के अंतर्गत प्रायोजित काजू उत्पादन एवं कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकियों पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण के साथ एकीकृत किया गया।

तकनीकी सत्रों में काजू उत्पादन, कटाई-पश्चात प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा कृषि व्यवसाय के अवसरों पर चर्चा की गई। किसानों को खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सतत काजू खेती तथा काजू सेब उत्पादों के माध्यम से मूल्य संवर्धन के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में काजू संग्रहालय, ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा उच्च घनत्व रोपण प्रदर्शनों का भ्रमण भी शामिल था।
समापन सत्र में, डॉ. टी.एन. रविप्रसाद, प्रभारी निदेशक, भाकृअनुप -डीसीआर, ने किसानों के साथ उन्नत काजू किस्मों, कीट प्रबंधन, कटाई-पश्चात उपयोग तथा सरकारी सहायता योजनाओं पर संवाद किया और वैज्ञानिक एवं सतत काजू खेती को बढ़ावा दिया।
भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वी क्षेत्र, पटना
भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पूर्वी क्षेत्र, पटना ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम तथा खेत बचाओ अभियान के सीधे प्रसारण का आयोजन किया, जिसमें 459 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें 125 महिला किसान शामिल थीं, ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) मुख्य अतिथि के रूप में, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (विस्तार) डॉ. आर. के. सिंह विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. अनूप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, ने खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत सतत एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की पहलों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ वृक्षारोपण अभियान और हरी खाद, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, मत्स्य पालन एवं पशुधन से संबंधित प्रदर्शनों के क्षेत्र भ्रमण के साथ हुआ, जिसके बाद प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण किया गया। तकनीकी सत्रों में संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, सीधे बीज बोई गई धान, जल-संरक्षण प्रौद्योगिकियाँ, प्राकृतिक खेती, हरी खाद तथा एकीकृत कृषि प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने , भाकृअनुप-आरसीईआर द्वारा विकसित उच्च उपज देने वाली तथा शीघ्र परिपक्व होने वाली लोबिया (लैबलैब) की किस्म ‘स्वर्ण विशिष्ट’ का विमोचन किया। किसानों ने सतत कृषि प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा सूखा-सहिष्णु धान किस्मों और उन्नत ग्रीष्मकालीन सब्जी फसलों के बीज प्राप्त किए, जिससे मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।
भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, मुंबई
भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, मुंबई ने अपने कोलकाता, मोतीपुर, रोहतक, पवारखेड़ा, काकीनाडा स्थित केंद्रों तथा बालाभद्रपुरम स्थित मीठे जल फार्म के साथ मिलकर आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. एन.पी. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफई के स्वागत संबोधन से हुआ तथा इसमें भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने भाग लिया।
गणमान्य व्यक्तियों ने पीएम-किसान के किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने में महत्व पर प्रकाश डाला तथा रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और आर्थिक विकास में मत्स्य क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर बल दिया।

प्रतिभागियों को खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा डिजिटल कृषि मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, राष्ट्रीय दलहन मिशन, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी प्रमुख पहलों के बारे में भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम ने अनुसंधान, शिक्षा, विस्तार और क्षमता निर्माण के माध्यम से सतत कृषि और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के प्रति आईसीएआर-सीआईएफई की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की।
कार्यक्रम में पीएम-किसान लाभार्थी किसानों, मत्स्य पालकों, वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा अन्य हितधारकों सहित लगभग 305 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदज़िफेमा, नागालैंड
भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदज़िफेमा ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया, जिसमें किसानों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
डॉ. गिरीश पाटिल, भाकृअनुप-एनआरसीएम, ने प्रतिभागियों को पीएम-किसान योजना के लाभों तथा भारत सरकार की विभिन्न प्रमुख योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य किसानों की आजीविका में सुधार लाना और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।

प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन के सीधे प्रसारण को भी देखा तथा किसान कल्याण और सतत ग्रामीण विकास का समर्थन करने वाली सरकारी पहलों के बारे में जागरूकता प्राप्त की।
भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार
भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया, जिसमें 103 प्रतिभागियों, जिनमें 92 किसान, प्रसार कर्मी तथा अन्य हितधारक शामिल थे, ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पीएम-किसान योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता जारी किए जाने के सीधे प्रसारण को देखा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. एस. के. सिंह ने पीएम-किसान योजना के किसानों की कृषि में निवेश क्षमता को सुदृढ़ करने तथा उनकी आजीविका में सुधार के महत्व पर प्रकाश डाला।

वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने कृषि उत्पादकता, लाभप्रदता तथा लचीलापन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संस्थागत सहयोग तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के महत्व पर बल दिया।
यह कार्यक्रम डॉ. एस. के. पुर्बे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया तथा इसका समापन उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, सरकारी योजनाओं तक अधिक पहुंच सुनिश्चित करने और क्षेत्र में सतत कृषि विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
भाकृअनुप–भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर
भाकृअनुप–भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर ने 20 जून, 2026 को पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम तथा एक वैज्ञानिक–किसान संवाद का सीधे प्रसारण का आयोजन किया।
प्रभारी डॉ. आर.के. पांडा, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईडब्ल्यूएम, ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और किसानों को पीएम-किसान सहायता का उपयोग गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की खरीद के लिए करने के लिए प्रोत्साहित किया।

वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, खेत बचाओ अभियान, जैव उर्वरकों, गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट, प्राकृतिक एवं जैविक खेती के माध्यम से मृदा उर्वरता पुनर्स्थापन तथा सतत पोषक तत्व प्रबंधन के लिए सेस्बानिया (ढैंचा), नैनो-यूरिया और नैनो-डीएपी के उपयोग के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक किसान–वैज्ञानिक सत्र के साथ हुआ, जिसमें मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन और सतत कृषि पद्धतियों से संबंधित किसानों के प्रश्नों का समाधान किया गया।
इस कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें कटक, पुरी और खुर्दा जिलों के 15 से अधिक अपनाए गए गांवों के लगभग 120 किसान शामिल थे।
भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-II, जोधपुर
भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-II, जोधपुर ने आज राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के सभी 66 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) में पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में पीएम-किसान उत्सव तथा खेत बचाओ अभियान कार्यक्रमों का समन्वय किया।
केवीके ने प्रधानमंत्री के संबोधन के सीधे प्रसारण का आयोजन किया तथा संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरकों के कुशल उपयोग, प्राकृतिक खेती, हरी खाद तथा आवश्यकता आधारित पौध संरक्षण पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

राजस्थान के 47 केवीके के माध्यम से कुल 6,022 किसानों और 592 अन्य प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि हरियाणा के 18 केवीके के माध्यम से 2,953 किसानों और 149 अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया। दिल्ली में 310 किसानों और 17 अन्य प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
इन कार्यक्रमों में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भगीरथ चौधरी, सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष श्री सी. आर. चौधरी, सांसद, विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधि शामिल थे, जिससे किसान कल्याण, सतत कृषि तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को और बल मिला।
भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे
भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के साथ पुष्पकृषि पर वैज्ञानिक–किसान संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम भाकृअनुप-डीएफआर परिसर, हडपसर, ग्राम ओझर (जुन्नर), पुणे तथा भाकृअनुप–राष्ट्रीय वाणिज्यिक कृषि अनुसंधान संस्थान, राजमुंद्री में भाकृअनुप-डीएफआर क्षेत्रीय केन्द्र, कादीयम के माध्यम से आयोजित किया गया, जिससे कुल 347 प्रतिभागियों को लाभ प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने उन्नत पुष्पकृषि उत्पादन प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक खेती एवं फसल प्रबंधन पद्धतियों तथा सतत उत्पादन विधियों का प्रसार किया और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से किसानों के प्रश्नों का समाधान किया।
इन कार्यक्रमों ने वैज्ञानिक–किसान संबंधों को सुदृढ़ किया, वैज्ञानिक पुष्पकृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित किया तथा पीएम-किसान योजना के अंतर्गत सरकारी पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाई, जिससे उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार में योगदान मिला।
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद
भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद ने आज तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले के तेलकापल्ली मंडल के बोपल्ले गांव के 60 किसानों के लिए पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया।
डॉ. गोपाल लाल, संयुक्त निदेशक, भाकृअनुप-एनएएआरएम तथा डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक, ने किसानों को नवीन कृषि प्रबंधन रणनीतियों और सतत कृषि पद्धतियों पर संबोधित किया।

सीधे प्रसारण से पूर्व किसानों ने संस्थान के कृषि फार्म ब्लॉकों का भ्रमण किया तथा खाद निर्माण, कृषि अपशिष्ट से वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन और पौध प्रवर्धन तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम में चार नवोन्मेषी किसानों को सम्मानित भी किया गया तथा सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और सतत कृषि के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ किया गया।
भाकृअनुप–निदेशालय खरपतवार अनुसंधान, जबलपुर
भाकृअनुप–निदेशालय खरपतवार अनुसंधान, जबलपुर ने आज पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया, जिससे 288 प्रतिभागियों, जिनमें पीएम-किसान लाभार्थी किसान, 24 सरपंच एवं उप-सरपंच, वैज्ञानिक, विद्यार्थी, कर्मचारी तथा अन्य हितधारक शामिल थे, ने प्रधानमंत्री के संबोधन का अवलोकन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकृअनुप-डीडब्ल्यूआर के निदेशक डॉ. जे. एस. मिश्रा ने की।

कार्यक्रम में भारत सरकार की किसान कल्याण, सतत कृषि तथा खेत बचाओ अभियान के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया, जिसमें प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आजोस्पिरिलम तथा फॉस्फेट सॉल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पीएसबी) जैव उर्वरक पैकेट किसानों को वितरित किए गए, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिले, मृदा उर्वरता में सुधार हो तथा सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन प्राप्त हो।
(स्रोत: संबंधित भाकृअनुप संस्थान)







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