मॉरीशस के सिविल सेवकों ने भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली का किया दौरा

मॉरीशस के सिविल सेवकों ने भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली का किया दौरा

6 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली

मॉरीशस के सिविल सेवकों (मध्य-करियर) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज दोपहर एनसीजीजी क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईएआरआई), नई दिल्ली का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली तथा संस्थान के अग्रणी योगदानों एवं नवाचारों के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। यह प्रतिनिधिमंडल मॉरीशस के विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों का था, जो उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

Mauritian Civil Servants visits ICAR-IARI, New Delhi

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने संस्थान के दृष्टिकोण, मिशन एवं कार्यक्षेत्र पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें देश की खाद्य सुरक्षा में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान तथा बासमती चावल जैसे उत्पादों के वैश्विक व्यापार में इसकी भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने हेतु कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान की अत्याधुनिक सुविधाओं जैसे नानाजी देशमुख प्लांट फिनोमिक्स सेंटर, जलवायु परिवर्तन अनुसंधान सुविधा, संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी केंद्र, सेंसर एवं रिमोट सेंसिंग आधारित प्रिसीजन फार्मिंग तथा रोबोटिक्स प्रयोगशाला के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल सुधार, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं उत्सर्जन प्रबंधन, प्रिसीजन फार्मिंग, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (विशेषकर मृदा एवं जल), हरित प्रौद्योगिकियां तथा अपशिष्ट प्रबंधन संस्थान के प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र हैं। उन्होंने मॉरीशस की कृषि प्रणालियों पर भी चर्चा करते हुए फसल विविधीकरण तथा समुद्र स्तर में वृद्धि एवं भूमि के जलमग्न होने की संभावित चुनौतियों के मद्देनजर अनुकूलन योजनाओं के विकास का सुझाव दिया।

प्रतिनिधियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि मॉरीशस को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप भारत के नवाचारों को अपनाना चाहिए, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। उन्होंने भाकृअनुप की संरचना तथा राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल; भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर; और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, मुंबई जैसे विशेष संस्थानों के कार्यों के बारे में भी जानकारी दी। लैंगिक दृष्टिकोण से संबंधित प्रश्नों पर उन्होंने बताया कि भाकृअनुप एक लैंगिक-संवेदनशील नीति ढांचे का पालन करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भाकृअनुप संस्थान मांग-आधारित अनुसंधान प्रणाली अपनाते हैं, जिसमें हितधारकों, विशेषकर किसानों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद को सुदृढ़ करने हेतु ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का भी उल्लेख किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ‘पूसा कृषि विज्ञान मेला’ जैसे प्रमुख जनसंपर्क कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिसमें हर वर्ष एक लाख से अधिक किसान, छात्र एवं अन्य हितधारक भाग लेते हैं।

Mauritian Civil Servants visits ICAR-IARI, New Delhi

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आर.एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप-आईएआरआई, के स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संस्थान की ऐतिहासिक विरासत, हरित क्रांति में इसकी भूमिका तथा निरंतर नवाचार एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

प्रतिनिधिमंडल ने भारत की कृषि को सुदृढ़ करने और किसानों की आजीविका सुधारने में भाकृअनुप एवं आईएआरआई की भूमिका की सराहना की। उन्होंने निकट भविष्य में ICAR के साथ समझौता ज्ञापन (समझौता ज्ञापन) करने की इच्छा भी व्यक्त की।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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