20 फरवरी, 2026, उदयपुर
भाकृअनुप के कृषि शिक्षा प्रभाग ने सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र (आईएनएफएलआईबीएनईटी), गांधीनगर तथा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर, के सहयोग से उत्तरी क्षेत्र के लिए “वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन” (ओएनओएस) पर एक दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन किया। यह कार्यक्रम एमपीयूएटी, उदयपुर, के अनुसंधान निदेशालय सभागार में आयोजित किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. प्रताप सिंह, कुलपति, एमपीयूएटी ने ओएनओएस योजना को भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल बताया, जो वैश्विक स्तर पर कृषि अनुसंधान को सुदृढ़ करेगी तथा “जय अनुसंधान” की भावना के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करेगी।

समापन सत्र के दौरान डॉ. एस. के. शर्मा, सहायक महानिदेशक (ईपी एवं एचएस), भाकृअनुप, ने कहा कि इस प्रकार की जागरूकता पहल देश में अनुसंधान एवं नवाचार की सुदृढ़ संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि “वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन” योजना भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करने में मील का पत्थर सिद्ध होगी, बशर्ते वैज्ञानिक, एम.एससी. एवं पीएच.डी. के छात्र ओएनओएस पोर्टल से सक्रिय रूप से जुड़ें और उसके संसाधनों का उपयोग करें। उन्होंने नोडल अधिकारियों, वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्षों तथा पुस्तकालय प्रभारियों से इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाने का भी आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान ओएनओएस योजना का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिसमें इसकी पृष्ठभूमि, उद्देश्य, कार्यान्वयन प्रक्रिया, अनुसंधान प्रभाव तथा वर्ष 2025 के उपयोग के आँकड़े शामिल थे। यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2021–25 के दौरान विभिन्न विषयों में कृषि अनुसंधान प्रकाशनों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई, जो उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संसाधनों तक बेहतर पहुँच के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
तकनीकी सत्र के दौरान ओएनओएस पहल के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को आईएनएफईईडॉ, लॉगिन प्रक्रिया, एक्सेस तंत्र, रिपोर्ट तैयार करने तथा डेटा विश्लेषण से संबंधित सुविधाओं के उपयोग हेतु चरणबद्ध मार्गदर्शन प्रदान किया गया। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा और प्रतिभागियों को प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुए।

कार्यक्रम में ओएनओएस के महत्व पर भी बल दिया गया, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं संकाय सदस्यों को उच्च गुणवत्ता वाली अंतरराष्ट्रीय शोध सामग्री तक निर्बाध एवं समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित हो सके। यह भी बताया गया कि यह पहल विश्वविद्यालय प्रणाली में शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ाने तथा अनुसंधान उत्पादकता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस कार्यक्रम में कुल 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 25 प्रतिनिधि भाकृअनुप संस्थानों से तथा शेष प्रतिभागी उत्तरी क्षेत्र के कृषि विश्वविद्यालयों से थे।







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