महानिदेशक, भाकृअनुप ने पंजाब के लिए फसल विविधीकरण एवं सतत कृषि रोडमैप के विकास पर दिया जोर

महानिदेशक, भाकृअनुप ने पंजाब के लिए फसल विविधीकरण एवं सतत कृषि रोडमैप के विकास पर दिया जोर

22 मार्च, 2026, लुधियाना

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय तथा पंजाब के किसान समुदाय के साथ अपने 25 वर्षों से अधिक के लंबे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए उनके प्रगतिशील दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने किसान मेले की थीम “फसल विविधीकरण अपनाएं, पर्यावरण बचाएं” की प्रशंसा करते हुए कहा कि यद्यपि सतत कृषि की दिशा में यात्रा चुनौतीपूर्ण है, फिर भी पंजाब के किसानों में इसे सफलतापूर्वक अपनाने की क्षमता तथा दृढ़ता है।

Dr M.L. Jat Advocates Crop Diversification and Sustainable Agriculture Roadmap for Punjab

उन्होंने फसल विविधीकरण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रीय कपास मिशन, दलहन मिशन, तिलहन मिशन और उच्च उत्पादक किस्म मिशन जैसी प्रमुख सरकारी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भाकृअनुप तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के बीच सहयोग से भूमि क्षरण, जल संकट, पर्यावरणीय स्थिरता एवं कृषि विपणन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु कई तकनीकों का विकास किया गया है।

डॉ. जाट ने पंजाब के किसानों की सराहना करते हुए धान की पराली जलाने में लगभग 90% की कमी को एक बड़ी उपलब्धि बताया और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कहा। उन्होंने कृषि में लाभप्रदता एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बाजार अनुसंधान को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा परीक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही, फास्फोरस उपयोग दक्षता बढ़ाने तथा कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर केन्द्रित अनुसंधान की आवश्यकता बताई।

Dr M.L. Jat Advocates Crop Diversification and Sustainable Agriculture Roadmap for Punjab

भविष्य की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने मूल्य श्रृंखलाओं और संपूर्ण कृषि-खाद्य प्रणाली पर अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे कृषि को स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ा जा सके। उन्होंने दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक कृषि विकास रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें सीधी बुवाई वाली धान (डीएसआर) के लिए स्पष्ट रणनीति और उत्पादकता व स्थिरता को अनुकूल बनाने हेतु विशेषीकृत कृषि क्षेत्रों के विकास को शामिल किया जाए।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-1, पीएयू परिसर, लुधियाना)

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