महानिदेशक, भाकृअनुप ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ की बैठक; बीएनआई-गेहूं परियोजना की प्रगति पर डाला प्रकाश

महानिदेशक, भाकृअनुप ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ की बैठक; बीएनआई-गेहूं परियोजना की प्रगति पर डाला प्रकाश

6 मार्च 2026, नई दिल्ली

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने आज नई दिल्ली में 11 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ओसामु कोयामा, अध्यक्ष, जापान इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल साइंसेज (जेआईआरसीएएस), कर रहे थे।

बैठक के दौरान डॉ. जाट ने भाकृअनुप, सिमिट-बीसा, जेआईआरसीएएस तथा जेआईसीए के बीच बीएनआई (जैविक नाइट्रीफिकेशन अवरोधन)–गेहूं परियोजना के अंतर्गत चल रहे सहयोग की सराहना की और इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

DG, ICAR Interacts with Japanese Delegation; Highlights Progress of BNI-Wheat Project

बीएनआई-गेहूं पहल के अंतर्गत प्राप्त महत्वपूर्ण प्रगति को स्वीकार करते हुए डॉ. जाट ने परियोजना के दायरे और प्रभाव को और अधिक विस्तारित करने के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों और कृषि प्रबंधन पद्धतियों का बीएनआई-गेहूं के प्रदर्शन पर प्रभाव को गहराई से समझने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इसे भारत के विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों में व्यापक रूप से अपनाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि यह परियोजना नाइट्रोजन उर्वरकों पर भारत की निर्भरता को कम करने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भाकृअनुप की साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए डॉ. जाट ने आशा व्यक्त की कि BNI-गेहूं परियोजना को वर्ष 2027 के बाद अगले पांच वर्षों के लिए और बढ़ाया जा सकता है, जिससे भारत में बीएनआई-गेहूं किस्मों का विकास और प्रसार संभव हो सके।

DG, ICAR Interacts with Japanese Delegation; Highlights Progress of BNI-Wheat Project

भाकृअनुप के महानिदेशक तथा जेआईआरसीएएस के अध्यक्ष दोनों ने भारत और जापान के बीच कृषि अनुसंधान सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, विशेष रूप से मानव संसाधन विकास और वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हुए।

डॉ. कोयामा ने सिमिट-बीसा के माध्यम से बीएनआई-गेहूं पहल को निरंतर समर्थन देने के लिए भाकृअनुप और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इस साझेदारी के तहत सहयोगात्मक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए जेआईआरसीएएस की प्रतिबद्धता को दोहराया।

(स्रोत: अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग, भाकृअनुप)

×