महानिदेशक, भाकृअनुप ने भाकृअनुप-आईआईएफआर, मोदीपुरम में ऑन-फार्म इंटरक्रॉपिंग प्रदर्शन का अवलोकन किया तथा किसानों एवं वैज्ञानिकों से किया संवाद

महानिदेशक, भाकृअनुप ने भाकृअनुप-आईआईएफआर, मोदीपुरम में ऑन-फार्म इंटरक्रॉपिंग प्रदर्शन का अवलोकन किया तथा किसानों एवं वैज्ञानिकों से किया संवाद

16 मई, 2026, मेरठ

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने आज भाकृअनुप-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएफएसआर), मोदीपुरम, मेरठ, का दौरा कर गन्ना + मूंगफली अंतरवर्तीय फसल प्रणाली पर चल रहे ऑन-फार्म प्रदर्शनों की समीक्षा की तथा प्रगतिशील किसानों एवं वैज्ञानिकों से संवाद किया। यह दौरा उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के अंतर्गत मेरठ जनपद के सरधना ब्लॉक के कुशावली एवं आसपास के गांवों में आयोजित किया गया।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान डॉ. जाट ने कहा कि घरेलू खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना देश की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकता है। उन्होंने वैज्ञानिक आधार पर विकसित अंतरवर्तीय खेती प्रणालियों को टिकाऊ कृषि परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए मजबूत तकनीकी हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया।

DG, ICAR Reviews On-Farm Intercropping Demonstrations and Interacts with Farmers and Scientists at ICAR-IIFSR, Modipuram

चल रहे प्रदर्शनों का अवलोकन करते हुए डॉ. जाट ने किसानों से सीधे संवाद कर गन्ना तथा मूंगफली अंतरवर्तीय खेती मॉडल के खेत स्तर पर प्रदर्शन एवं व्यावहारिक लाभों की जानकारी ली। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में गन्ना आधारित फसल प्रणालियों के साथ संसाधन-कुशल तकनीकों के माध्यम से 10 लाख हैक्टर से अधिक क्षेत्र में मूंगफली एवं अन्य तिलहनी फसलों के विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम के अंतर्गत महानिदेशक ने कुशावली स्थित ‘नीर आदर्श ऑर्गेनिक’ किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का भी दौरा किया, जहां उन्होंने श्री विनोद सैनी एवं अन्य प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। चर्चा का मुख्य विषय एकीकृत कृषि प्रणालियों को अधिक उत्पादक, आर्थिक रूप से लाभकारी एवं पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ बनाने पर आधारित था।

दौरे के दौरान तकनीकी चर्चाओं में कृषि यंत्रीकरण, उन्नत फसल प्रबंधन पद्धतियों तथा कीट एवं रोग प्रबंधन हेतु सुदृढ़ पौध संरक्षण रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि किसानों की आय एवं आजीविका सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। साथ ही, अंतरवर्तीय मूंगफली प्रणाली के माध्यम से जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण की भूमिका को भी समझने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. सुनील कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएफएसआर, मोदीपुरम; डॉ. एस.एन. सुशील, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ; सीमिट के वरिष्ठ वैज्ञानिक, संस्थान के विभागाध्यक्ष, परियोजना अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल रहे।

DG, ICAR Reviews On-Farm Intercropping Demonstrations and Interacts with Farmers and Scientists at ICAR-IIFSR, Modipuram

क्षेत्र भ्रमण के उपरांत डॉ. जाट ने भाकृअनुप-आईआईएफएसआर परिसर में वैज्ञानिक, प्रशासनिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के साथ एक संवादात्मक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने संस्थान में हो रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए वैज्ञानिकों को अपने शोध को खेत की वास्तविक आवश्यकताओं एवं किसानों की जरूरतों से अधिक निकटता से जोड़ने के लिए प्रेरित किया, ताकि कृषि तकनीकों का व्यापक प्रसार एवं अधिक प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

यह दौरा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, एकीकृत कृषि प्रणालियों को सशक्त बनाने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर एवं लचीले कृषि विकास के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ)

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