19 मई, 2026, भोपाल
मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति (कृषि विकास समिति) के प्रतिनिधिमंडल ने आज भाकृअनुपु-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (भाकृअनुपु-सिफे), भोपाल, का दौरा किया और फसल अवशेष प्रबंधन तथा पराली जलाने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत बैठक एवं चर्चा की। बैठक में विशेष रूप से मध्य प्रदेश तथा पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रमुख कृषि राज्यों में फसल अवशेष प्रबंधन की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों, पर्यावरणीय प्रभावों और टिकाऊ समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।
समिति के अध्यक्ष श्री ठाकुरदास नागवंशी ने मध्य प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित तकनीकों की समीक्षा और उनके प्रसार में समिति की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि अवशेषों के अनुचित प्रबंधन से उत्पन्न प्रमुख समस्याओं की चर्चा करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए संस्थानों, नीति-निर्माताओं, उद्योगों और किसानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक को समिति के सदस्यों श्री शिव नारायण सिंह, श्री श्रीकांत चतुर्वेदी, श्री जितेंद्र पंड्या और श्री साहब सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग के कई अधिकारी भी उपस्थित रहे।

श्री उमेश शर्मा, अतिरिक्त सचिव, विधानसभा सचिवालय ने सभा को संबोधित करते हुए कृषि विकास समिति के भाकृअनुपु-सीआईएई दौरे के उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फसल अवशेषों की बढ़ती मात्रा, उनके दहन से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों तथा प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
डॉ. सी.आर. मेहता, निदेशक, भाकृअनुपु-सीआईएई ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों तथा वर्तमान अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में संस्थान द्वारा विकसित उन्नत मशीनों और टिकाऊ उपयोग तकनीकों के प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने सेंसर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रोबोटिक्स आधारित कृषि तकनीकों, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित प्रौद्योगिकियों तथा बाजरा और सोयाबीन आधारित नवाचारी खाद्य उत्पादों पर चल रहे अनुसंधानों की भी जानकारी दी। डॉ. मेहता ने विभिन्न राज्यों में फसल अवशेष उत्पादन और पराली जलाने की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए अवशेष प्रबंधन में कृषि यंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर और सुपर एसएमएस जैसी तकनीकों को खेत में ही फसल अवशेष प्रबंधन के प्रभावी समाधान बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने बायोमास आधारित विद्युत उत्पादन, पेलेट निर्माण, एथेनॉल उत्पादन, बायोगैस एवं बायो-सीएनजी उत्पादन, ब्रिकेट निर्माण तथा कम्पोस्टिंग जैसी खेत के बाहर अवशेष प्रबंधन की विभिन्न संभावनाओं पर भी चर्चा की।

चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, जिनमें किसानों के बीच फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उपयुक्त कृषि यंत्रों को प्रोत्साहित करना, व्यापक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करना तथा पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए व्यावहारिक मॉडल विकसित करना शामिल था। प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी बल दिया और फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित समस्याओं के समाधान में रिलायंस और आईओसीएल (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) जैसे उद्योगों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। दौरे के दौरान कृषि विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण किया, जहाँ संस्थान द्वारा विकसित अनेक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल)







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