25–26 जून, 2026, निंबूदेरा
भाकृअनुपृ–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), निंबूदेरा, ने "खेत बचाओ अभियान 2026" के तहत 25–26 जून, 2026 को उत्तर एवं मध्य अंडमान के डिगलीपुर ब्लॉक के सुभाषग्राम तथा मधुपुर गांवों में सतत कृषि पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की। यह कार्यक्रम यूटीएटीएमए, कृषि विभाग, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ऐसी सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था, जिनसे फसल उत्पादकता में वृद्धि, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, संसाधनों के उपयोग की दक्षता में सुधार, बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता में कमी तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को सतत कृषि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। इनमें संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का महत्व एवं प्रभावी उपयोग, वर्मी कम्पोस्ट एवं कम्पोस्ट के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों से बीज उपचार, धान की वैज्ञानिक खेती, समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा जैसे विषय शामिल थे। इसके अतिरिक्त किसानों को उन्नत फसल किस्मों को अपनाने के महत्व से भी अवगत कराया गया तथा बेहतर उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए उन्नत धान एवं सब्जी फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज वितरित किए गए।

किसान–विशेषज्ञ संवाद सत्र के दौरान किसानों ने अपने खेतों से जुड़े अनुभव, उत्पादन संबंधी समस्याएं और फसल उत्पादन में आने वाली चुनौतियां साझा कीं। विशेषज्ञों ने उन्हें कृषि आदानों के कुशल प्रबंधन, समेकित पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा सतत फसल उत्पादन के लिए उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह कार्यक्रम भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान (सीआईएआरआई), श्री विजयपुरम के के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में 42 किसान एवं महिला किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)







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