केवीके हुगली में आई-राईज कार्यक्रम का उद्घाटन: ग्रामीण युवाओं के लिए अवसर तथा कृषि-नेतृत्व के रास्ते का मार्ग प्रशस्त

केवीके हुगली में आई-राईज कार्यक्रम का उद्घाटन: ग्रामीण युवाओं के लिए अवसर तथा कृषि-नेतृत्व के रास्ते का मार्ग प्रशस्त

30 जनवरी, 2025, हुगली

आज हुगली कृषि विज्ञान केन्द्र (बीसीकेवी) में 23-दिवसीय आई-राईज (इनकल्केटिंग रूरल इंडिया स्किल एनहांसमेंट) कौशल विकास कार्यक्रम के उद्घाटन के साथ कृषि परिवर्तन तथा युवा सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यह केन्द्र भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह पहल युवा-नेतृत्व वाले कृषि-विकास में - आकांक्षाओं को उद्यमों में बदलने तथा ग्रामीण भारत के भविष्य को मजबूत करने हेतु एक नया बेंचमार्क स्थापित करता है।

उद्घाटन सत्र में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, और डॉ. पल्लव दत्ता, डीईई, बीसीकेवी उपस्थित थे।

IRise Programme Inaugurated at KVK Hooghly: Creating Opportunities and Agri-Leadership Pathways for Rural Youth

डॉ. प्रदीप डे ने बताया कि आई-राईज एक सीएसआर-नेतृत्व वाली परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभरा है, जो ग्रामीण युवाओं को आधुनिक कृषि के लिए आवश्यक कौशल, आत्मविश्वास एवं भविष्य की तैयारी से लैस कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यक्रम व्यावहारिक प्रशिक्षण, फील्ड एक्सपोजर और उद्योग-जुड़े इंटर्नशिप के माध्यम से आकांक्षाओं को रोजगार तथा उद्यमिता में बदल रहा है, जिससे विकसित भारत @2047 के विजन में योगदान मिल रहा है। डॉ. डे ने आगे कहा कि केवीके हुगली और सिंजेंटा फाउंडेशन के बीच साझेदारी एक प्रभावी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से पश्चिम बंगाल में ग्रामीण सशक्तिकरण एवं कृषि परिवर्तन का एक शक्तिशाली और प्रतिकृति मॉडल प्रस्तुत करती है।

डॉ. पल्लव दत्ता ने कहा कि केवीके हुगली में आई-राईज सहयोग को ग्रामीण युवाओं को व्यावहारिक कौशल विकास एवं सार्थक उद्योग अनुभव प्रदान करके उभरते कृषि-व्यवसाय के अवसरों के लिए प्रभावी ढंग से तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों की उद्यमशीलता क्षमताओं को काफी मजबूत किया है, जिससे वे मशरूम की खेती, नर्सरी प्रबंधन, मुर्गी पालन, वर्मीकम्पोस्टिंग और वैज्ञानिक बागवानी जैसे उद्यमों में कदम रख सके हैं। यह प्रभावशाली सार्वजनिक-निजी भागीदारी पश्चिम बंगाल में कुशल, आत्मविश्वासी तथा आत्मनिर्भर कृषि-उद्यमियों की एक नई पीढ़ी का पोषण कर रही है।

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आई-राईज ने कृषि विज्ञान केन्द्रों और कॉर्पोरेट क्षेत्र के बीच सार्थक तालमेल के लिए एक बेंचमार्क भी स्थापित किया है, यह दिखाते हुए कि कैसे सहयोगात्मक प्रयास स्थायी आजीविका के अवसर पैदा कर सकते हैं, व्यक्तिगत करियर विकास का समर्थन कर सकते हैं, और राज्य के समग्र कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम में हुगली और आसपास के जिलों के 35 युवा कृषि-उद्यमी उम्मीदवारों (18-35 वर्ष) ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता) 

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