केवीके हावड़ा में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ: मृदा स्वास्थ्य, सतत कृषि एवं किसान समृद्धि के लिए सामूहिक पहल

केवीके हावड़ा में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ: मृदा स्वास्थ्य, सतत कृषि एवं किसान समृद्धि के लिए सामूहिक पहल

1 जून, 2026, हावड़ा

भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, के अंतर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान केन्द्र (बीसीकेवी), हावड़ा, में देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों, प्रशासनिक अधिकारियों, वैज्ञानिकों तथा प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिससे मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत कृषि विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बल मिला।

सभा को संबोधित करते हुए श्री अनुपम घोष, विधायक, जगतबल्लवपुर विधानसभा क्षेत्र, ने कहा कि कृषि भूमि और मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण किसानों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों में जागरूकता बढ़ाने, जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन को सुदृढ़ करने तथा मृदा की उत्पादकता को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने हेतु कृषि आदानों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर अपने संदेश में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-एटारी, कोलकाता, ने कहा कि खेत बचाओ अभियान एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जो मृदा स्वास्थ्य को खाद्य सुरक्षा, किसान समृद्धि, पर्यावरणीय स्थिरता तथा विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण से जोड़ती है। उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग तथा हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों जैसी सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि मृदा स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित किया जा सके और कृषि प्रणाली की सहनशीलता को मजबूत बनाया जा सके। डॉ. डे ने फसल विविधीकरण, लाभप्रदता और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए दलहन मिशन और तिलहन मिशन के संबंध में किसानों को जागरूक करने के महत्व पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में डॉ. संतोष कुमार जाना, उप कृषि निदेशक, हावड़ा; जगतबल्लवपुर ब्लॉक के सहायक कृषि निदेशक; उलूबेरिया के सहायक कृषि निदेशक (फार्म); तथा केवीके हावड़ा के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भी भाग लिया। अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, वैज्ञानिक प्रसार गतिविधियों के विस्तार तथा किसान-केंद्रित ज्ञान प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों को तेजी से अपनाया जा सके। उन्होंने दोहराया कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण कृषि उत्पादकता, पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि का आधार है।

इस अभियान का उद्देश्य किसानों को व्यावहारिक, खेत-आधारित ज्ञान तथा उपयोगी परामर्श उपलब्ध कराना था, जिससे वे कृषि संबंधी निर्णय अधिक जानकारीपूर्ण और सतत तरीके से ले सकें। कार्यक्रम में संतुलित उर्वरक उपयोग, रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने तथा हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों जैसी पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व उपयोग दक्षता और कृषि लाभप्रदता में सुधार हो सके। किसानों को उपयुक्त, स्थान-विशिष्ट फसल प्रणालियों को अपनाने के लिए मृदा परीक्षण के महत्व के प्रति भी जागरूक किया गया।

फसल विविधीकरण, उत्पादकता वृद्धि और बेहतर आजीविका अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए दलहन मिशन, तिलहन मिशन तथा खरीफ परामर्श से संबंधित जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम ने किसानों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों और प्रसार कर्मियों के बीच सतत कृषि के मार्गों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया।

खेत बचाओ अभियान के शुभारंभ के माध्यम से केवीके हावड़ा ने जमीनी स्तर पर विज्ञान-आधारित परामर्श और सतत कृषि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

हावड़ा जिले के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 60 किसानों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे अभियान के उद्देश्यों के प्रति जमीनी स्तर पर व्यापक रुचि और सहभागिता का प्रदर्शन हुआ।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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