27 जून, 2026, बारामती
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री राम नाथ ठाकुर ने जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक खेती तथा सतत संसाधन प्रबंधन पर संस्थान की अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों की समीक्षा के लिए आईसीएआर–राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईएएसएम), बारामती, पुणे का दौरा किया।
मंत्री ने संस्थान परिसर में पीपल (फिकस रेलिजियोसा) का पौधा लगाया तथा प्राकृतिक खेती परियोजना के प्रदर्शन का अवलोकन किया, जहां वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक आदानों का उत्पादन, किसानों के नेतृत्व में किए जा रहे खेत प्रदर्शन तथा बारामती में अपनाई जा रही जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने संस्थान के जल शोधन संयंत्र का भी दौरा किया तथा भाकृअनुप–एनआईएएसएम द्वारा अपनाई गई सतत जल प्रबंधन पद्धतियों की सराहना की।
संवाद कार्यक्रम के दौरान डॉ. के. सम्मी रेड्डी, निदेशक, भाकृअनुप–एनआईएएसएम, ने संस्थान की प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियों की जानकारी दी तथा चल रहे "खेत बचाओ अभियान" पर प्रकाश डाला, जिसके माध्यम से संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देकर 70 गांवों के 2,501 किसानों तक पहुंच बनाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा फॉस्फोरस उर्वरकों की खपत कम करने के उद्देश्य से 500 खेत प्रदर्शनों की योजना बनाई जा रही है।
वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अन्य हितधारकों को संबोधित करते हुए श्री राम नाथ ठाकुर ने कृषि में अजैविक तनावों से निपटने के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे किसान-केंद्रित अनुसंधान एवं विकसित तकनीकों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों को किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच बनाने, किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने तथा सतत कृषि विकास के लिए तकनीकों के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को भी अपने-अपने गांवों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया तथा भारतीय कृषि की उभरती चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से भाकृअनुप–एनआईएएसएम की स्थापना के पीछे की दूरदर्शिता की प्रशंसा की।
इस अवसर पर मंत्री ने भाकृअनुप–एनआईएएसएम वार्षिक प्रतिवेदन 2025, "कृषि में अजैविक तनाव के शमन हेतु प्रौद्योगिकियां" शीर्षक प्रकाशन तथा "फार्म तालाबों में मत्स्य पालन" पुस्तिका का विमोचन किया।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, किसानों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, बारामती, पुणे)







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